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New Delhi : बोफोर्स घोटाले पर भाजपा का वार, कहा- राहुल-सोनिया को इस्तीफा देना चाहिए

नई दिल्ली : (New Delhi) पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (former Prime Minister Rajiv Gandhi) के कार्यकाल के दौरान हुआ बोफोर्स घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। बोफोर्स केस के बारे में चित्रा सुब्रमण्मय की किताब में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि राहुल और सोनिया गांधी को तब तक अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, जब तक वे ओटावियो क्वात्रोची नाम के व्यापारी और उसके परिवार के साथ अपने संबंधों का खुलासा नहीं करते। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस का भ्रष्टाचार, दलाली, कमीशनखोरी अब जगजाहिर है।

एक लेखक चित्रा सुब्रमण्यम (Chitra Subramaniam) की किताब आई है और उस किताब में जो तथ्य सामने आए हैं वे बेहद चिंताजनक हैं। वे उजागर करते हैं कि चाहे वो राजीव गांधी हों या सोनिया, ये लोग दलाली से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि राजीव और सोनिया के दामन पर बोफोर्स की दलाली ऐसा दाग है, जो कभी मिटेगा नहीं।भाटिया ने किताब का हवाला देते हुए कहा कि जो तथ्य सामने आए हैं उस पर भाजपा कुछ सवाल उठाना चाहती है। ओटावियो क्वात्रोची ने बोफोर्स घोटाले में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे और खुलेआम दावा किया कि वे कंपनियों के लिए सरकारी अनुबंध हासिल कर सकते हैं। क्वात्रोची के पास भारतीय प्रधानमंत्री से पहले ही प्रमुख रक्षा सौदों से जुड़ी गोपनीय सरकारी फाइलों तक पहुंच थी।

राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान क्वात्रोची ने विशिष्ट कंपनियों के पक्ष में बदलाव किए और अनुबंध हासिल किए, जिसमें राजीव गांधी ने इन बदलावों में मदद की।भाजपा प्रवक्ता भाटिया ने सोनिया, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी से एक प्रश्न पूछते हुए कहा कि क्वात्रोची के पास संवेदनशील फाइलें क्यों भेजी जा रही थीं? ऐसे दलालों का भारत में क्या काम है? उन्होंने मांग की कि राहुल और सोनिया को इस मामले में जवाब देना चाहिए और अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। भाटिया ने ये भी दावा किया कि 1984 से 1988 के बीच इटली में भारत के राजदूत ने यह बयान दिया था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का क्वात्रोची परिवार से बहुत करीबी संबंध था और वे इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार थे। इसके अलावा तत्कालीन लेखा महानियंत्रक ने भी यह कहा था कि बोफोर्स तोपों की खरीद के मूल्यांकन में गंभीर खामियां थीं।

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