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New Delhi : चिंताजनक रिपोर्ट: डॉक्टरों की कमी से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था

नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (Central Government Health Scheme) के तहत चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठा रहे लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। एक तरफ जहाँ लाभार्थियों की संख्या में हर साल 10% का इजाफा हो रहा है, वहीं डॉक्टरों और फार्मासिस्टों की भारी कमी ने व्यवस्था को चरमरा दिया है।

लाभार्थियों की तेज़ी से बढ़ती संख्या, डॉक्टर घटते
अगस्त 2025 तक CGHS लाभार्थियों की संख्या करीब 48 लाख तक पहुँच गई है और इसमें हर साल 10% की वृद्धि दर्ज हो रही है। इसके उलट, जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (MO)(General Duty Medical Officers) के पद लगातार खाली पड़े हैं। रिक्तियों और अवकाश के कारण डॉक्टरों की उपलब्धता में लगभग 30% की गिरावट आई है, जिससे डॉक्टर-लाभार्थी अनुपात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

कागजों पर मंजूरी, जमीनी स्तर पर देरी
पिछले तीन वर्षों में 38 नए CGHS एलोपैथिक केंद्रों (38 new CGHS Allopathic centers) को मंजूरी दी गई, लेकिन इनमें से 22 केंद्र एक साल बाद भी शुरू नहीं हो पाए हैं। ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स’ (‘Confederation of Central Government Employees and Workers,’)के अनुसार, पद सृजित होने के बावजूद नियुक्तियों में देरी के कारण लाभार्थियों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

एसआईयू मानकों की अनदेखी
मानक निरीक्षण इकाई (Standard Inspection Unit) के अनुसार, प्रत्येक केंद्र पर 4 डॉक्टर और 3 फार्मासिस्ट होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में अधिकांश केंद्रों पर केवल 1 डॉक्टर और 1 फार्मासिस्ट ही तैनात हैं। ऐसे में एक डॉक्टर के लिए 15,000 से 25,000 मरीजों को संभालना अव्यावहारिक हो गया है।

डॉक्टर की छुट्टी = केंद्र बंद
स्थिति इतनी नाजुक है कि यदि एकमात्र डॉक्टर या फार्मासिस्ट छुट्टी पर चला जाए, तो स्वास्थ्य केंद्र को बंद करना पड़ता है। सामान्य तौर पर एक डॉक्टर 55–65 मरीजों का ही गुणवत्तापूर्ण इलाज कर सकता है, लेकिन मौजूदा हालात में मरीजों की संख्या इससे कहीं अधिक है, जिससे कई लोग बिना इलाज लौटने को मजबूर हैं।

सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
कॉन्फेडरेशन के महासचिव बीएस यादव ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा (Finance Minister Nirmala Sitharaman and Health Minister JP Nadda) से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि संसदीय समिति की सिफारिशों और SIU मानकों के अनुसार पदों को जल्द भरा जाए, ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

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