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New Delhi : हरित अमोनिया व हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति का समझौता ऐतिहासिक : आरके सिंह

नई दिल्ली : भारत से जापान तक हरित अमोनिया की आपूर्ति के लेकर मंगलवार को ऑफ-टेक टर्म शीट पर हुए हस्ताक्षर के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया बनाने की भारत की लागत पहले से ही दुनिया में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी है। जापान और अन्य विकसित देशों को हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया की भारी आवश्यकता है, जिसे भारत सबसे प्रतिस्पर्धी दरों पर आपूर्ति करने में सक्षम होगा। इन्होंने इस समझौते को ऐतिहासिक बताया।

आरके सिंह ने कहा कि यह एक नई दुनिया है, जहां हम जीवाश्म ईंधन और कार्बन को हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया जैसे हरित और नवीकरणीय ईंधन से प्रतिस्थापित करते हैं। उन्हाेंने कहा कि जापान भारत का घनिष्ठ मित्र और भागीदार रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा को हरित बनाने में यह सहयोग हमारी साझेदारी को और मजबूत करेगा।

मंगलवार को भारत में अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी एसीएमई समूह और जापान की भारी उद्योग क्षेत्र की आईएचआई कॉरपोरेशन के बीच भारत (ओडिशा) से जापान तक हरित अमोनिया की आपूर्ति के लिए एक ऑफ-टेक टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए। आफ-टेक टर्म शीट पर एसीएमई समूह के संस्थापक व अध्यक्ष मनोज उपाध्याय और आईएचआई कॉरपोरेशन के अध्यक्ष व सीईओ हिरोशी आइडे ने केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। इस मौके पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव भूपिंदर सिंह भल्ला और भारत में जापान के राजदूत हिरोशी सुजुकी माैजूद रहे।

ग्रीन अमोनिया के उत्पादन में हाइड्रो-इलेक्ट्रिक, सौर ऊर्जा या पवन टरबाइन जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग किया जाता है। हरित अमोनिया बनाने की एक विधि जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन को वायु द्वारा अलग करना है। पवन तथा सौर ऊर्जा जैसे नवीनीकरण ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके पानी के विद्युत अपघटन द्वारा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को पृथक करके ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है।

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