
नयी दिल्ली: (New Delhi) दिल्ली की एक अदालत ने मई 2021 में लॉकडाउन के दौरान कथित रूप से इधर-उधर घूमने वाले एक व्यक्ति को लोकसेवक के आदेश की अवमानना के आपराधिक आरोप से मुक्त कर दिया और कहा कि इल्जाम संदेह से परे साबित नहीं हो पाया।अदालत ने कहा कि सबूत और महत्वपूर्ण पहलुओं के विश्लेषण के आधार पर अभियोजन पक्ष के मुकदमे में “कई कमियां” दिखाई दीं।अदालत राजीव नामक व्यक्ति के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिस पर शालीमार बाग के सहायक पुलिस आयुक्त के कर्फ्यू आदेश का जानबूझकर उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी को 15 मई 2021 को आजादपुर मंडी के पास कोविड-19 महामारी के प्रकोप के दौरान बिना किसी अनुमति या संतोषजनक कारण के “घूमते हुए” पाया गया था।अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नीति सूरी मिश्रा ने इस महीने की शुरुआत में पारित एक आदेश में कहा, “मेरे विचार से, आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक के विधिवत आदेश की अवज्ञा) के अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि अभियोजन पक्ष अपने मामले को सभी उचित संदेहों से परे साबित करने में विफल रहा है।”


