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New Delhi : देश में कुल जलविद्युत क्षमता का 29 प्रतिशत उपयोग: आर के सिंह

नयी दिल्ली : भारत ने जलविद्युत के क्षेत्र में कुल क्षमता का 29 प्रतिशत उपयोग किया है। वहीं अमेरिका और यूरोपीय संघ ने क्रमशः 80 प्रतिशत और 70 प्रतिशत से अधिक पनबिजली क्षमता का उपयोग किया है। संसद में मंगलवार को यह जानकारी दी गई।

केन्द्रीय बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि वर्ष 1978-1987 के दौरान केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अध्ययन के अनुसार, देश में अनुमानित जलविद्युत क्षमता लगभग 1,45,320 मेगावॉट (25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए) है।

सिंह ने कहा कि 1,45,320 मेगावाट में से 42,104.6 मेगावाट (29 प्रतिशत) क्षमता का विकास किया जा चुका है और 15,023.5 मेगावाट (10.3 प्रतिशत) क्षमता की परियोजनाएं निर्माणाधीन है।

उन्होंने सदन को बताया कि इंटरनेशनल हाइड्रोपावर एसोसिएशन (आईएचए) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अपनी कुल जलविद्युत क्षमता का 80 प्रतिशत से अधिक विकसित कर चुका है। वहीं यूरोपीय संघ (यूरोपीय संघ) ने अपनी जलविद्युत क्षमता का 70 प्रतिशत से अधिक विकसित किया है।

मंत्री ने कहा कि देश में जलविद्युत क्षमता के विकास में मुख्य चुनौतियां सुदूर क्षेत्र, अप्रत्याशित भूविज्ञान, प्राकृतिक आपदाएं, पर्यावरण और वन मुद्दे, पुनर्वास और पुनर्स्थापन (आर एंड आर) मुद्दे, कानून और व्यवस्था के मुद्दे और अंतरराज्यीय मुद्दे हैं।

एक अलग उत्तर में, सिंह ने सदन को बताया कि 14 मार्च, 2023 तक, देश में तापीय बिजलीघरों में कुल कोयले का भंडार 3.33 करोड़ टन है, जो सामान्य भंडार आवश्यकता का केवल 49 प्रतिशत है।

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकार के कोयला भंडार मानदंड बिजली संयंत्रों को कोयला स्टॉक बनाए रखना अनिवार्य करता हैं जो माह-दर-माह के आधार पर अलग-अलग होता है।

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