
मां-बेटी ने एक साथ दे रहीं हाईस्कूल परीक्षा
वर्षों पहले पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी मेहनतकश महिलाओं ने दिए बोर्ड एग्जाम
नवी मुंबई : (Navi Mumbai) नवी मुंबई में इस वर्ष दसवीं की परीक्षा के साथ एक प्रेरणादायक पहल चर्चा में है। वर्षों पहले पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी मेहनतकश महिलाओं ने दोबारा किताबें थामी हैं और अब वे दसवीं की परीक्षा दे रही हैं। 30 से 55 वर्ष आयु वर्ग की इन महिलाओं की शिक्षा अलग-अलग कारणों से रुक गई थी, लेकिन अपने बच्चों को आगे बढ़ते देख उन्होंने अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने का संकल्प लिया। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अक्षदा गायकवाड और उनकी बेटी सृष्टि गायकवाड (Akshada Gaikwad and her daughter, Srishti Gaikwad) इस वर्ष एक साथ परीक्षा दे रही हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन गया है।
फिल्म से प्रेरणा, फिर शुरू हुई कक्षाएं
इस पहल की जानकारी देते हुए प्रभात ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत भा. थोरात (Dr. Prashant Bha, President of Prabhat Trust) ने बताया कि इसकी शुरुआत 10 मई को मजदूर महिलाओं के लिए आयोजित ‘आता थांबायचं नाय’ फिल्म के विशेष प्रीमियर से हुई। फिल्म से प्रेरित होकर कई महिलाओं ने दोबारा पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद प्रभात ट्रस्ट और स्त्रीमुक्ती संघटना के संयुक्त प्रयास से विशेष अध्ययन कक्षाएं शुरू की गईं। प्रोफेसर वृषाली मगदूम के मार्गदर्शन में 6 जुलाई 2025 को आषाढ़ी एकादशी के दिन इन कक्षाओं की औपचारिक शुरुआत हुई।
संघर्ष, सहयोग और नई उम्मीद
बारिश, बीमारी, लंबी यात्राएं और घरेलू जिम्मेदारियों के बावजूद महिलाओं ने पढ़ाई जारी रखी। स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र और गैप सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज जुटाना भी आसान नहीं था, फिर भी उनका हौसला अडिग रहा। परीक्षा से पहले आयोजित उत्साहवर्धन कार्यक्रम में उदयकुमार शिरूरकर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे और सभी ने महिलाओं के जज्बे की सराहना की। सामाजिक सुधारक कर्मवीर भाऊराव पाटील (Karmaveer Bhaurao Patil) के आदर्शों से प्रेरित यह पहल शिक्षा के माध्यम से वंचित वर्ग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इन महिलाओं की कहानी साबित करती है कि वे रुकी जरूर थीं, लेकिन हारी नहीं थीं।


