नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगरपालिका के राजमाता जिजाऊ अस्पताल ऐरोली में 3 सितंबर 2019 से नवीनतम उपकरणों के साथ 17 बिस्तरों के साथ नवजात गहन देखभाल इकाई शुरू की है। इस विभाग का प्रदर्शन उत्कृष्ट है और पिछले वर्ष इस अस्पताल को लक्ष्य – ( लेबर रूम क्वालिटी इम्प्रूवमेंट इनिशिएटिव) रेटिंग – प्लैटिनम का दर्जा प्राप्त हुआ है। ऐसी रेटिंग प्राप्त करने वाला यह नवी मुंबई महानगरपालिका का पहला अस्पताल है।
चूंकि इस लक्ष्य कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक विशेष कार्यशाला आवश्यक है, इसलिए इस अस्पताल में दो दिनों के लिए बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम फर्स्ट गोल्डन मिनट प्रोजेक्ट नामक एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस 2 दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिन 32 एवं दूसरे दिन 30 प्रशिक्षु उपस्थित रहे। इसमें डॉक्टरों और नर्सों को प्रशिक्षित किया गया। जिसमें जन्म के समय दम घुटने से होने वाली नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।
हमारे देश में बर्थ एस्फिक्सिया के कारण मृत्यु दर 20% से अधिक है और यदि नवजात शिशुओं का इलाज पहले मिनट में बेसिक एनआरपी प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सों द्वारा किया जाए, तो इस दर को कम किया जा सकता है।इस लिहाज से यह कार्यशाला बहुत महत्वपूर्ण थी।

100 नवजात शिशुओं में से 10 को पुनर्जीवन की आवश्यकता होती है। इस कार्यशाला के कारण कुल 62 प्रशिक्षुओं को इस प्रकार के पुनर्जीवन के लिए प्रशिक्षित किया गया है। कार्यक्रम की योजना अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. वर्षा राठौड़, डॉ. अमोल देशमुख एवं डॉ. सचिन बिरादर के मार्गदर्शन में किया गया। इस समय डॉ. अभिजीत म्हापनकर, डॉ. ओमप्रकाश जमादार, डॉ. शीतल कोल्हे और रत्ना देवारे के साथ ही 06 अगस्त 2023 को कोच के रूप में अनीता हांडे, ज्योति पाइकराव और नेस्वरी फर्नांडो शामिल हुईं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वर्षा राठौड़ का मानना है कि इस कार्यशाला के कारण राजमाता जिजाऊ अस्पताल ऐरोली में जन्म श्वासावरोध की दर में काफी कमी आएगी।


