नैनीताल : बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में पिछले 3 दिनों से लोग स्वयं अपने आशियानों को तोड़ रहे थे, लेकिन रविवार को चौथे दिन प्रशासन का ध्वस्तीकरण अभियान पूरे जोर से शुरू हो गया है।
क्षेत्र में प्रशासन के मजदूरों के साथ छोटी स्टोन कटर मशीनों के बाद तीन जेसीबी मशीनें भी क्षेत्र में पहुंच गयी हैं। वहीं ध्वस्तीकरण अभियान व जेसीबी की वजह से क्षेत्र की बिजली के साथ ही इंटरनेट की सेवायें भी ठप हो गयी हैं।
इससे पूर्व सुबह बारिश के बीच कुछ देरी से प्रशासनिक अभियान शुरू हो पाया। बाद में एडीएम शिवचरण द्विवेदी की अगुवाई में एसडीएम प्रमोद कुमार तथा झील विकास प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय के निर्देशन में प्रशासनिक अमला स्टोन कटर मशीनों पर भारी संख्या में लोनिवि व अन्य विभागों के मजदूरों के साथ क्षेत्र में डटा और भवनों पर घन बरसाकर दीवारों, छतों व कॉलम-बीम आदि को तेजी से ध्वस्त करना शुरू कर दिया।
अपराह्न में करीब 4 बजे जिला चिकित्सालय के आवासों की ओर नाला नंबर 20 की शाखा का पाटकर तीन जेसीबी मशीनें भी क्षेत्र में पहुंच गयीं। इसके बाद अभियान के और जोर पकड़ने की संभावना है। जेसीबी मशीनों तथा अभियान की सक्रियता के बीच क्षेत्र में बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। क्षेत्र में रोज दिन में सुबह 10 से अभियान की समाप्ति तक बिजली की आपूर्ति काटी जा रही है, जबकि रविवार को क्षेत्र की इंटरनेट ब्रॉडबेंड की लाइनें भी अभियान की चपेट में आकर कट गयी हैं।
कुल 57 भवन ध्वस्तीकरण के लिये चिन्हित –
क्षेत्र में पहले प्रशासन ने 36 घरों को जिला चिकित्सालय की भूमि पर चिन्हित किया था और उन्हें तोड़ने के आदेश दिये थे। इसके बाद आधे, आढ़े-तिरछे या हिस्सों में चिन्हित हुए घरों को भी पूरी तरह खाली कर तोड़ने के आदेश दिये गये, जबकि इसके बाद 15 और भवनों को भी ध्वस्तीकरण के लिये चिन्हित किया गया है। एसडीएम प्रमोद कुमार ने बताया कि यह सभी भवन पहले से ही जिला चिकित्सालय की भूमि पर अतिक्रमण के रूप में चिन्हित हैं। इधर क्षेत्र वासियों का आरोप है कि प्रशासन लगातार चिन्हित भवनों की संख्या बढ़ा रहा है।


