
इंडिया ग्राउंड रिपोर्ट डेस्क
नागपुर:(Nagpur) महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के सदस्यों (members of opposition parties) ने मंगलवार को विधानसभा परिसर में ‘वरकारियों’ (भगवान विट्ठल के पंढरपुर स्थित मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों) की तरह पदयात्रा निकालकर प्रदर्शन किया और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया।
पिछली महा विकास आघाड़ी (MVA) के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री रहने के दौरान कृषि मंत्री अब्दुल सत्तार के भूमि ‘नियमितीकरण’ आदेश पर उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष द्वारा हंगामा कर कार्यवाही बाधित किए जाने के बाद सोमवार को महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया था।
बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने पिछले हफ्ते सत्तार को एक नोटिस जारी किया था, जिन्होंने दीवानी अदालत के आदेश के विरुद्ध सार्वजनिक ‘गायरान’ (पशुओं के चरने के लिए जमीन) के लिए आरक्षित भूमि के कब्जे को एक निजी व्यक्ति के पक्ष में ‘नियमित’ करने का आदेश दिया था।
इससे पहले, विपक्षी दलों के सदस्यों ने मुख्यमंत्री शिंदे के इस्तीफे की भी मांग की थी, जब 14 दिसंबर को उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार में मंत्री रहते हुए झुग्गी निवासियों के लिए आरक्षित जमीन को निजी व्यक्तियों को आवंटित करने के शिंदे के फैसले पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
इस संबंध में शिंदे ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है और 22 दिसंबर को उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री द्वारा हाल में जारी किए गए नियमितीकरण के आदेश को वापस लेने की बात स्वीकारते हुए कहा कि वह इस मामले को बंद मान रहा है।
मंगलवार को विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने विधान भवन परिसर में उसी तरह पैदल मार्च निकाला, जिस तरह से ‘वरकारी’ पंढरपुर शहर में भगवान विठ्ठल के मंदिर की तीर्थ यात्रा के लिए मार्च निकालते हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री शिंदे और सत्तार सहित राज्य के कुछ मंत्रियों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए घंटी बजाई और नारे लगाए।
विधानसभा में विपक्ष के नेता अजित पवार, शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे, कांग्रेस नेता नाना पटोले और अन्य लोग प्रदर्शन में शामिल हुए।


