
मुंबई : (Mumbai) समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अबू आजमी (Senior Samajwadi Party leader Abu Azmi) ने वंदे मातरम के नए दिशा-निर्देशों पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि यह गीत मुसलमान विरोधी नहीं है, बल्कि उनकी धार्मिक मजबूरी है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी आस्था होती है और किसी पर किसी धर्म के अनुसार कुछ करने का दबाव नहीं होना चाहिए।
‘हम देश का सम्मान करते हैं’
अबू आजमी ने कहा वंदे मातरम का मुसलमान विरोध नहीं कर रहा, लेकिन उसकी धार्मिक मजबूरी (Muslims are not protesting against Vande Mataram, but rather have a religious compulsion) है। वह अल्लाह के अलावा किसी और की प्रार्थना नहीं कर सकता। जब हम विधानसभा में जाते हैं तो वंदे मातरम गाया जाता है, हम खड़े रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सभी की अपनी-अपनी आस्था है। अगर मैं खड़े होकर कुरान की कोई सूरा पढ़ूं और किसी गैर-मुसलमान से पढ़ने के लिए कहूं, तो यह सही नहीं होगा। आपका धर्म जो कहता है आप वह करेंगे, मेरा धर्म मुझे वह करने देता है। हम सब भारतवासी हैं और इस देश का सम्मान करते हैं।
अजित पवार के मामले पर क्या बोलें?
अबू आजमी ने भाजपा पर भी टिप्पणी की और कहा कि कभी-कभी कुछ लोग ऐसे मुद्दे लाते हैं, जिससे हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच विवाद पैदा हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का संविधान स्पष्ट करता है कि हर नागरिक अपने धर्म का पालन करते हुए दूसरे धर्म का सम्मान करे और मिलकर देश को आगे बढ़ाए। सपा नेता ने दिवंगत अजित पवार के मामले पर भी अपनी (SP leader also expressed his opinion on the case of the late Ajit Pawar) राय दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को जांच कराने की मांग है, तो मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को इसे स्वीकार करना चाहिए, ताकि मामले में सभी पहलू स्पष्ट हो जाएं।


