मुंबई : (Mumbai) उल्हास नदी में प्रदूषण कम करने के लिए, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहन घुगे ने 01 अप्रैल, 2025 को महारल, वरप और कांबा का दौरा किया और उल्हास नदी में जलपक्षी का निरीक्षण किया है। इस समय उल्हास नदी की विशालता को देखते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहन घुगे ने ग्राम पंचायतों को जल संरक्षण के संबंध में प्रस्ताव तत्काल कार्रवाई के लिए सरकार को भेजने का निर्देश दिया। जिला परिषद प्रशासन ने भी बड़े हो चुके जल लिली के पौधों को हटाकर उनसे सजावटी सामान बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए जिला परिषद के माध्यम से जानकारी दी गई है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को सजावटी सामान बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ठाणे जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि हम वीड टू वेल्थ परियोजना शुरू करने जा रहे हैं। इसके तहत नदी से खरपतवार यानी जल लिली को निकालकर सुखाया जाएगा और उन्हें सजावटी सामान में बदला जाएगा। इसके लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षित कर उन्हें यह काम दिया जाएगा। इन सजावटी वस्तुओं को बेचकर महिला स्वयं सहायता समूहों को आय प्राप्त होगी।
चूंकि उल्हास नदी बेसिन में पानी की कमी को देखते हुए यह कार्य व्यापक और महंगा है, इसलिए ग्राम पंचायत को इस संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। इस दौरे के दौरान मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अंबरनाथ पंचायत समिति का दौरा किया और 100 दिवसीय कार्य योजना के तहत चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इसके अलावा, वराप ग्राम पंचायत के महारल में अपशिष्ट जल प्रबंधन परियोजना की वर्तमान स्थिति और स्थल नियोजन पर भी चर्चा की गई। ग्राम पंचायत काम्बा में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन स्थल का निरीक्षण किया गया तथा दिशा-निर्देश दिए गए।