
मुंबई : सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत सावरकर ने बुधवार को कहा सावरकर साहित्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए । रंजीत सावरकर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की स्वातंत्र्य वीर सावरकर के जन्मदिवस को ‘स्वातंत्र्य वीर गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा का स्वागत किया है। रंजीत ने यह भी कहा कि सावरकर की मूर्तियां लगाना ही जरूरी नहीं है, बल्कि उनके विचारों को सभी तक पहुंचाना भी जरूरी है।
रंजीत सावरकर ने पत्रकारों को बताया कि स्वतंत्रता नायक सावरकर पर की गई विभिन्न अपमानजनक आलोचनाओं और बयानों को देखते हुए यह उचित है कि सावरकर को इस तरह महिमामंडित किया जाए। साथ ही सावरकर के विचारों को भी जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। पहले सावरकर का साहित्य स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में अध्ययन के लिए था, लेकिन आज ऐसा नहीं है। इसलिए सावरकर के साहित्य को पाठ्यक्रम में लाने जरूरत है। रंजीत सावरकर ने कहा कि स्वातंत्र्य वीर सावरकर की बीए की डिग्री मुंबई विश्वविद्यालय ने वापस ले लिया था, लेकिन 1960 में उनकी डिग्री वापस कर दी गई, इसके बाद भी उनका नाम मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों में नहीं आता है। रंजीत सावरकर ने यह भी कहा कि वीर सावरकर का नाम पूर्व छात्रों में शामिल किया जाना चाहिए और कुलपति को भी इस संबंध में पहल करनी चाहिए।


