मुंबई : भारतीय मजदूर आंदोलन में ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के अस्तित्व में आने से पहले 1896 में नाविक संघ ‘नुसी’ की स्थापना हुई थी। अब इस संस्था के 126 वर्ष पूरे हो चुके हैं और नाविकों एवं उनके परिवारों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। संगठन के महासचिव मिलिंद कांडलगांवकर ने कहा कि कार्यकर्ताओं के लिए यह काम जारी रहेगा। भारतीय और विदेशी जहाजों पर भारतीय नाविकों को रोजगार प्रदान करके इसे बनाए रखने के लिए नुसी सक्षम योजना के तहत नाविकों के लिए कौशल विकास पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। नाविकों के छात्रावासों में वाईफाई योजना ‘नुसी संवाद’ चल रही है, जहां उन्हें खाद्य अनुदान योजना के तहत निःशुल्क ‘नुसी थाली’ दी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नाविकों के श्रमिक नेता अब्दुलगनी सेरांग ने पदाधिकारियों के सहयोग से भारतीय नाविकों के लाभ के लिए कई अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय वेतन वृद्धि समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
बच्चों के भविष्य के लिए चलाई जा रही है नुसी सलाह” योजना
सीमेंस प्रोविडेंट फंड, वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम, लोनावला में श्रम आंदोलन प्रशिक्षण केंद्र, गोवा में नुसी समुद्री अकादमी के साथ-साथ पनवेल में नुसी ऑफ शोर प्रशिक्षण केंद्र, नाविक कल्याण और उनके परिवारों के लिए नुसी आईटीएफ ट्रस्ट जैसी कई योजनाएं वर्तमान में कार्यान्वित की जा रही हैं। सीमेंस प्रोविडेंट फंड घोटाले में 92.78 करोड़ की राशि नुसी के आंदोलन और वरिष्ठ श्रमिक नेता डॉ. जानकारी दी गई कि शांति पटेल के सहयोग और शरद पवार के प्रयासों से भारत सरकार से रिफंड लिया गया। इस बीच पिछले कई वर्षों से नौसी शिक्षा अभियान, छात्रवृत्ति, नाविकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए चिकित्सा स्वास्थ्य सहयोग योजना, नाविकों के परिवारों के लिए सिलाई कक्षाएं, सहेली स्वयंरोजगार योजना, स्त्री शिक्षा अभियान आदि चलाए जा रहे हैं। जहां व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए नुसी सुविधा के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, वहीं नाविकों के बच्चों के भविष्य के लिए “नुसी सलाह” योजना चलाई जा रही है।


