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Mumbai : मुंबई नगर निगम का महापौर पद ओपन महिला के लिए आरक्षित

मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र के २९ नगर निगमों के महापौर का पद गुरुवार (mayoral posts for 29 municipal corporations in Maharashtra were decided on Thursday) को आरक्षण पद्धति से तय किया गया, इसके तहत मुंबई नगर निगम का महापौर पद ओपन महिला यानी किसी भी वर्ग की महिला के लिए यह आरक्षित हो गया है। जबकि इस आरक्षण पद्धति में एसटी प्रवर्ग के लिए एक, एससी प्रवर्ग के लिए चार और ओबीसी प्रवर्ग के लिए आठ महापौर आरक्षित किए हैं।

मुंबई स्थित मंत्रालय में गुरुवार को नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाल की अध्यक्षता (chairmanship of Minister of State for Urban Development, Madhuri Misal) में महाराष्ट्र के २९ नगर निगमों के महापौर पद लॉटरी पद्धति से तय किए गए। इसके तहत कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में एसटी प्रवर्ग का महापौर तय किया गया है। इसी तरह ठाणे, जालना नगर निगम में एससी प्रवर्ग का पुरुष महापौर और जालना, लातुर नगर निगम में एससी प्रवर्ग की महिला महापौर तय किया गया है। इसके बाद ओबीसी प्रवर्ग के महापौर पद के लिए लॉटरी निकाली गई।

इसमें चंद्रपुर, जलगांव, आकोला और अहिल्यानगर नगर निगम का महापौर ओबीसी महिला पद के लिए आरक्षित तय किया गया। साथ ही पनवेल, इचलकरंजी, उल्हासनगर और कोल्हापुर नगर निगम के लिए ओबीसी पुरुष प्रवर्ग का महापौर तय किया गया है। इसके बाद ओपन प्रवर्ग के लिए महापौर पद की लॉटरी निकाली गई। इस लाटरी में मुंबई, नवी मुंबई, मीरा-भाईंदर, पुणे, धुले, नांदेड़, मालेगांव, नासिक और नागपुर में महिला ओपन प्रवर्ग का महापौर तय किया गया। इसी तरह पिंपरी-चिंचवड़,सांगली, सोलापुर, अमरावती, परभणी, वसई- विरार, भिवंडी और संभाजी नगर में ओपन पुरुष वर्ग का महापौर तय किया गया है।

महापौर के लिए आरक्षण पद्धति का विरोध शिवसेना यूबीटी की नेता किशोरी पेडणेकर (Shiv Sena (UBT) leader Kishori Pednekar) ने विरोध किया। किशोरी पेडणेकर ने कहा कि मुंबई नगर निगम का महापौर इससे पहले दो बार महिला ओपन प्रवर्ग का था। इस बार मुंबई नगर निगम केमहापौर के लिए ओबीसी अथवा एससी, एसटी प्रवर्ग में लाटरी डालनी चाहिए थी। लेकिन यह सब पहले से तय कर मुंबई नगर निगम की लाटरी ओपन प्रवर्ग में डाली गई। इससे एससी, एसटी और ओबीसी प्रवर्ग को न्याय नहीं मिला है।

नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी पिसाल ने कहा कि महाराष्ट्र के २९ नगर निगमों में महापौर के आरक्षण की प्रकिया पारदर्शक तरीके से पूरी की गई है। शिवसेना यूबीटी का आक्षेप उनकी मर्जी के महापौर प्रवर्ग के लिए था, जबकि सारी प्रकिया सबके सामने और नियमों के अधीन की गई है। इसलिए शिवसेना यूबीटी के विरोध का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

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