
10 मार्च को होगा विधान भवन का घेराव
16 संगठनों ने मिलाया हाथ
मुंबई : (Mumbai) गिरनी कामगारों (Mill workers) ने अपने हक की लड़ाई को एक बार फिर सड़कों पर उतारने का फैसला किया है। वर्षों से अपने घर का सपना देख रहे मजदूरों का धैर्य अब जवाब दे गया है, जिसके चलते मंगलवार, 10 मार्च को विधान भवन के घेराव की बड़ी तैयारी की गई है।
16 संगठनों की एकजुट ताकत
‘गिरनी कामगार संयुक्त संघर्ष समिति’ (Girni Kamgar Sanyukt Sangharsh Samiti) के बैनर तले मुंबई के 16 बड़े ट्रेड यूनियन एक साथ आ गए हैं। इसमें राष्ट्रीय मिल मज़दूर संघ जैसे प्रभावी संगठन भी शामिल हैं। मजदूरों का कहना है कि अब बैठकों का दौर खत्म हुआ, अब सड़कों पर उतरने का समय है।
भावनाओं के साथ खिलवाड़ का आरोप
मजदूर नेताओं का आरोप है कि जुलाई 2025 में हुए आंदोलन के बाद सरकार ने ‘पॉजिटिव’ फैसले का भरोसा दिया था, लेकिन वह केवल एक छलावा साबित हुआ। सरकार ने मजदूरों की उम्मीदें जगाकर उनके साथ विश्वासघात किया है, जिससे कामगारों के परिवारों में भारी गुस्सा है।
कहाँ-कहाँ से जुटेंगे ‘कामगार’?
इस मोर्चे की गूँज केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगी। ठाणे, कोंकण और पश्चिम महाराष्ट्र (Thane, Konkan, and Western Maharashtra) सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से हजारों मिल मजदूर और उनके उत्तराधिकारी (वारिस) इस घेराव में शामिल होने के लिए निकल चुके हैं।
गोविंदराव मोहिते की चेतावनी
राष्ट्रीय मिल मज़दूर संघ के जनरल सेक्रेटरी गोविंदराव मोहिते (Govindrao Mohite, General Secretary of the Rashtriya Mill Mazdoor Sangh) ने साफ कर दिया है कि यह विरोध प्रदर्शन सरकार को नींद से जगाने के लिए है। अगर अब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।
क्या हैं मुख्य मांगें?
मुंबई में ही घर: मजदूरों की स्पष्ट मांग है कि उन्हें शहर से बाहर नहीं, बल्कि मुंबई की सीमाओं के भीतर ही घर दिए जाएं।
बने हुए घरों का कब्जा: जो घर बनकर तैयार हैं, उन्हें तुरंत रिलीज कर पात्र मजदूरों को सौंपा जाए।
15 साल का इंतजार खत्म हो: पिछले डेढ़ दशक से जो मजदूर कागजी कार्रवाई और लॉटरी के इंतजार में फंसे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाए।


