
मुंबई : परिवहन मंत्रालय के नए नियमों के मुताबिक, अब कार में पीछे बैठे शख्स को भी सीट बेल्ट लगाना जरूरी है। नए नियमों के मुताबिक, अगर पीछे बैठने वाले शख्स ने भी सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं किया है तो उस पर 1000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। इस तुगलकी फरमान के खिलाफ जनता दल अब मैदान में उतरने जा रही है। कार एक्सीडेंट के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए सरकार एक्शन मोड में आ गई है। जिसके बाद कार में बैठने वाले सभी लोगों के लिए सीट बेल्ट लगाना जरूरी बना दिया गया है। ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए कार में सीट बेल्ट अलार्म को अनिवार्य बना दिया है। ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की तरफ से यह फैसला कार दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के नजरिए से किया गया है।
सीट बेल्ट अलार्म भी हुआ अनिवार्य
कारों में सीट बेल्ट न लगाने पर पैसेंजर्स को ऑडियो और वीडियो वॉर्निंग भी मिलेगी। अब M और N केटेगरी वाहनों में सीट बेल्ट अलार्म अनिवार्य होगा। साथ ही गाड़ियों में अब ओवर स्पीड अलार्म भी अनिवार्य होगा। परिवहन मंत्रालय ने इसे लेकर एक ड्राफ्ट नोटीफिकेशन जारी किया है। इसका सबसे बड़ा कारण यह बताया गया है कि कार में पीछे बैठने वाले अधिकतर लोग सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करते हैं, ऐसे में वे अधिक हादसे का शिकार होते हैं। एक सर्वे में भी यह सामने आया है कि भारत में हर 10 में से 7 लोग कार में पीछे बैठने पर सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते हैं।
सरकार का यह तुगलकी फरमान है : रवि भिलाने
जनता दल के सेक्रेटरी रवि भिलाने का कहना है कि यह सरकार का तुगलकी फरमान है,जिसके खिलाफ जनता दल रास्ते पर उतर कर इसका पुरजोर विरोध भी करेगी। उनका यह भी कहना है कि जब मुंबई शहर में ट्राफिक और गड्ढों की समस्या के चलते गाड़ी की रफ्तार पचास के पार नहीं जा पाती है तो ऐसे नियम कम से कम मुंबई शहर में तो नहीं लागू होने चाहिए।
टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री और उनके मित्र जहांगीर पेंडोला की कार दुर्घटना में हुई मौत की वजह से पीछे बैठे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। ऐसे में रियर सीट बेल्ट को अनिवार्य बनाने की बात शुरू हो गई है। इसी बीच सड़क परिवहन मंत्रालय ने रियर सीट बेल्ट के लिए अलार्म सिस्टम स्थापित करने के लिए कार निर्माताओं को इसे अनिवार्य रूप से लगाने के एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को जारी किया है।


