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Mumbai : ठाणे चुनाव में दलों का मेल सिर्फ कागजी, प्रत्याशी खुद के प्रचार में जुटे

Mumbai: In the Thane elections, the alliance between the parties is only on paper; the candidates are busy campaigning for themselves

मुंबई : (Mumbai) जैसे-जैसे ठाणे में महानगर पालिका चुनाव (Thane Municipal Corporation elections) पास आ रहे हैं, दलों में गठबंधन और गठबंधन के बीच उपजी दुविधा और भी साफ होता जा रही है। भले ही अलायंस-अलायंस, जॉइंट मीटिंग और जॉइंट कैंपेन का शोर बाहर से दिख रहा हो, लेकिन असल में, “वोट किसी और को भी दो, लेकिन अपना एक हक़ वोट मेरे हाथ में दो” का पर्सनल सीक्रेट कैंपेन अब एक खुला राज़ बनता जा रहा है।

अलायंस या अलायंस के कैंडिडेट के तौर पर मैदान में उतरे कई कैंडिडेट पार्टी या अलायंस की मिली-जुली ताकत का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी पर्सनल पहचान, फाइनेंशियल ताकत, सोशल ग्रुप, इमोशनल अपील और अंदरूनी सेटिंग्स पर ज़्यादा फोकस करते दिख रहे हैं। भले ही पब्लिक प्लेटफॉर्म पर दावा किया जा रहा है कि “अलायंस एकजुट है”, लेकिन अलायंस के आइडिया को किनारे रखकर सड़कों, मीटिंग और बंद दरवाजों के पीछे अपने-अपने बैलेट बॉक्स सुरक्षित करने का खेल चल रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ वार्ड में अलायंस के कैंडिडेट के एक-दूसरे के खिलाफ इनडायरेक्टली कैंपेन करने की भी बात हो रही है। जैसे-जैसे कैंडिडेट्स में “मुझे चुना जाना चाहिए, कौन जीतता है या हारता है, यह पार्टी ज़िम्मेदार है” वाली सोच बढ़ रही है, वैसे-वैसे अलायंस के अंदर के मतभेद सामने आने लगे हैं।

पॉलिटिकल एनालिस्ट्स के मुताबिक, यह अलायंस की क्रेडिबिलिटी के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे वोटर्स में कन्फ्यूजन पैदा हो रहा है। “अगर उम्मीदवार को ही गठबन्धन पर भरोसा नहीं है, तो मतदाता क्यों रखें?” यह सवाल अब खुलकर पूछा जा रहा है।

यह साफ होता जा रहा है कि ठाणे में यह चुनाव सिर्फ पार्टी बनाम पार्टी नहीं बल्कि प्रत्याशी बनाम प्रत्याशी है। इसका सीधा असर मतदान पद्धति, वोट बंटवारे और अंतिम निष्कर्ष पर पड़ने की संभावना है। एक तरफ गठबन्धन का झंडा हाथ में है, तो दूसरी तरफ अपनी तस्वीर मजबूत करने के लिए निजी मुहिम चल रहा है। ठाणे मनपा का चुनाव (Thane Municipal Corporation election) राजनीतिक लड़ाई के बजाय अंदरूनी स्वार्थ का बाजार बन गया है।

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