
मुंबई : (Mumbai) बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने गुरुवार को महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण (Muslim reservation in Maharashtra) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए शिक्षा और नौकरियों में मिलने वाले 5 प्रतिशत मुस्लिम कोटे को खत्म कर दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग (Social Justice Department) ने 17 फरवरी 2026 को एक शासनादेश (GR) जारी किया था। इसके तहत मुस्लिम समुदाय (विशेष पिछड़ा वर्ग-ए) को मिलने वाले 5 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े सभी पुराने फैसलों और अध्यादेशों को रद्द कर दिया गया। इसी आदेश के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
वकील सैयद एजाज अब्बास नकवी (Advocate Syed Ejaz Abbas Naqvi) ने अपनी याचिका में दलील दी है कि सरकार का यह कदम बिना किसी ठोस आधार के एक विशेष अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला समानता के अधिकार और मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है और समुदाय के शैक्षिक व सामाजिक हितों के लिए बेहद हानिकारक है। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति छागला (Justice Chagla) की पीठ ने संकेत दिया है कि वह इस बात की गहराई से जांच करेगी कि क्या सरकार का यह फैसला कानून और संविधान के दायरे में आता है या नहीं। इस मामले की अगली सुनवाई 4 मई 2026 को तय की गई है।


