
मुंबई : (Mumbai) बच्चों की आँखों की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। अगर कम उम्र में आँखों की बीमारियों का पता नहीं लगाया गया, तो उनके नतीजे हमेशा के लिए हो सकते हैं। इसलिए, माता-पिता को जागरूक होना और समय पर जाँच करवाना ज़रूरी है, हेल्थ डायरेक्टर नितिन अंबाडेकर (Health Director Nitin Ambadekar) ने कहा। वह ठाणे सिविल हॉस्पिटल में शुरू हुए ‘चिल्ड्रन आई क्लिनिक’ (‘Children’s Eye Clinic’) के शुभारंभ के मौके पर बोल रहे थे।
यह नेत्र चिकित्सालय अब हर मंगलवार को नियमित चलेगा, और शिशुओं की आँखों की सभी तरह की समस्याओं का इलाज एक ही जगह पर किया जाएगा। इसमें मायोपिया (नज़दीकी नज़र), एम्ब्लियोपिया,( मंद दृष्टि) और स्ट्रैबिस्मस ( भेंगापन ) सर्जरी जैसी ज़रूरी सर्विस के साथ-साथ बच्चों में मोतियाबिंद का इलाज भी शामिल है।
डॉ. नितिन अंबाडेकर ने कहा कि मोबाइल, टीवी और डिजिटल डिवाइस का ज़्यादा इस्तेमाल बच्चों की आँखों के लिए खतरा बन रहा है। फिर भी, कई माता-पिता शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर आंखों को मसलना , रगड़ना, बार-बार पानी आना, पढ़ाई में ध्यान न लगना, पास की चीज़ों को देखना या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखें और इलाज न किया जाए, तो आगे का इलाज मुश्किल हो सकता है। इस शुभारंभ के मौके पर ज़िला सर्जन डॉ. कैलास पवार, अतिरिक्त ज़िला सर्जन डॉ. धीरज महानगड़े, नेत्र चिकित्सक डॉ. शुभांगी अंबाडेकर, डॉ. अर्चना पवार और दूसरे अधिकारी मौजूद थे।
ऐसे में, सरकारी लेवल पर उपलब्ध कराई गई यह सर्विस बहुत ज़रूरी साबित हो रही है और आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके के लिए बहुत बड़ा सहारा बनेगी। ज़िला सर्जन डॉ. कैलास पवार (District Surgeon Dr. Kailas Pawar) ने कहा कि हर माता-पिता तक यह मैसेज पहुंचाना ज़रूरी है, “देर न करें, चेकअप ज़रूरी है।”
बच्चों की आंखों को सुरक्षित रखना सिर्फ़ एक मेडिकल ज़रूरत नहीं बल्कि एक सामाजिक ज़िम्मेदारी है। इसलिए, ऑप्थल्मोलॉजिस्ट( नेत्र चिकित्सक )डॉ. शुभांगी अंबाडेकर (Ophthalmologist Dr. Shubhangi Ambadekar) ने माता-पिता से अपील की है कि वे हर मंगलवार सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक उपलब्ध इस सर्विस का फ़ायदा उठाएं और अपने बच्चों की आंखों की सेहत बनाए रखें।


