
मुंबई : (Mumbai) मध्य रेलवे (CR) अपना पांचवां उपनगरीय कॉरिडोर प्राप्त करने के लिए तैयार है, क्योंकि महत्वाकांक्षी पनवेल-कर्जत उपनगरीय रेल परियोजना (Panvel-Karjat suburban rail project) अब पूर्णता के करीब है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 30 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष कार्य मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तुरंत बाद ट्रेन सेवाएं शुरू होने की संभावना है।
3,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण
मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन (MRVC) (Mumbai Railway Vikas Corporation) द्वारा निष्पादित इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,000 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य पनवेल और कर्जत के बीच उपनगरीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना, मौजूदा मार्गों पर दबाव कम करना और विस्तारित मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के तेजी से विकसित हो रहे नोड्स तक पहुंच को आसान बनाना है।
29.6 किमी लंबा संरेखण, पांच स्टेशन शामिल
परियोजना दस्तावेजों के अनुसार, कुल संरेखण 29.6 किलोमीटर तक फैला है और इसमें पांच स्टेशन — पनवेल, चिखले, पोयांजे (मोहपे), चौक और कर्जत — शामिल हैं। इस कॉरिडोर में दो रेल फ्लाईओवर (कुल 2.6 किमी), 47 पुल और 20 रोड ओवरब्रिज/अंडरपास बनाए गए हैं, जो इस परियोजना के विशाल इंजीनियरिंग पैमाने को दर्शाते हैं।
मुंबई उपनगरीय नेटवर्क की सबसे लंबी सुरंग
MRVC के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुनील उदासी ने बताया कि परियोजना का एक प्रमुख आकर्षण 2.63 किलोमीटर लंबी वावरले सुरंग है, जो मुंबई के उपनगरीय रेलवे नेटवर्क (longest tunnel in Mumbai’s suburban railway network) की सबसे लंबी सुरंग होगी। इसके अलावा, संरेखण में तीन सुरंगें — नाधाल (234 मीटर), वावरले (2,639 मीटर) और किरावली (333 मीटर) — बनाई गई हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई 3.2 किलोमीटर से अधिक है।
पहली बार बैलास्टलेस ट्रैक का उपयोग
उपनगरीय प्रणाली में पहली बार बैलास्टलेस ट्रैक (बिना गिट्टी वाले ट्रैक) का (Ballastless track) उपयोग किया गया है। MRVC के मुख्य परियोजना प्रबंधक योगेश शर्मा (Chief Project Manager Yogesh Sharma) ने कहा,ल कि सुरंगों के भीतर बैलास्टलेस ट्रैक का काम उन्नत चरण में है और लाइनिंग तथा फिनिशिंग कार्य लगातार प्रगति पर है।
पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच निर्माण
परियोजना का संरेखण वन और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में सुरंग खुदाई और मिट्टी कार्यों के दौरान कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय अपनाए गए। अधिकारियों के अनुसार, संरचनात्मक स्थिरता और पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियंत्रित ब्लास्टिंग तकनीक और उन्नत भूवैज्ञानिक मूल्यांकन का उपयोग किया गया।
यार्ड संशोधन बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती
पनवेल और कर्जत में बड़े स्तर पर यार्ड संशोधन किए गए, जिनमें जटिल पॉइंट शिफ्ट शामिल थे। यह कार्य चल रही ट्रेन सेवाओं को बाधित किए बिना किया गया, जिसे रेलवे इंजीनियरों ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि बताया है।
सेवा शुरू होने से यात्रियों को बड़ा लाभ
परियोजना के चालू होने के बाद पनवेल और कर्जत के बीच उपनगरीय ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ेगी, यात्रा समय कम होगा और नवी मुंबई को कर्जत-कल्याण बेल्ट से जोड़ने वाला एक नया वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। इससे भविष्य के शहरी विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
मानसून के बाद सेवा शुरू होने की संभावना
सिविल, सुरंग और ट्रैक कार्य अंतिम चरण में हैं। रेलवे अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मानसून की शुरुआत से पहले फिनिशिंग कार्य पूरा कर लिया जाएगा। सुरक्षा मंजूरी और ट्रायल रन के बाद पनवेल-कर्जत कॉरिडोर पर उपनगरीय सेवाएं मानसून के तुरंत बाद शुरू होने की उम्मीद है।
मध्य रेलवे के मौजूदा कॉरिडोर
इस नए कॉरिडोर के जुड़ने के बाद मध्य रेलवे पर मेन लाइन, हार्बर लाइन, ट्रांस हार्बर लाइन और पोर्ट लाइन के साथ यह पांचवां उपनगरीय (fifth suburban corridor on Central Railway, joining the Main Line, Harbour Line, Trans-Harbour Line, and Port Line) कॉरिडोर होगा।


