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MUMBAI : महाराष्टू में वैधव्य परंपराओं पर प्रतिबंध के अभियान को मजबूती मिली, विधवाएं पंडालों में आमंत्रित

मुंबई : महाराष्ट्र में वैधव्य परंपराओं पर प्रतिबंध लगाने के अभियान को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और 7,500 से अधिक गांवों ने इन प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रस्ताव पारित किया है। गणपति पंडालों ने भी संबंधित प्रथाओं के खिलाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का काम किया है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद जिंजादे ने बताया कि कोल्हापुर का हेरवाड़ गांव राज्य में ऐसा पहला गांव है, जिसने चूड़ी तोड़ने, सिंदूर पोंछने और मंगलसूत्र तथा बिछुए उतारने जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए इस साल मई में एक प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा, ‘विधवाओं को आरती करने और भगवान की मूर्तियों की पूजा करने की अनुमति देने की गणेश पंडालों से की गई मेरी अपील को उत्सव के दौरान अच्छी प्रतिक्रिया मिली। लगभग 100 मंडलों ने विधवाओं को आरती करने की अनुमति दी और 1500 ऐसी महिलाओं को सम्मानित किया।’ पुणे के पंडाल में आमंत्रित की गईं विधवा आशा शिंदे (80) ने इस घटनाक्रम पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, ‘वर्ष 2011 में मेरे पति की मृत्यु के बाद से, मैं अकेली रहती हूं क्योंकि मेरे बच्चे विदेश में हैं। पति की मृत्यु के बाद मैंने इस तरह के सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग नहीं लिया है, क्योंकि विधवाओं का समाज में कोई स्थान नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं संतुष्ट हूं। मेरे परिवार की महिलाएं कभी भी मेरे साथ विधवा की तरह व्यवहार नहीं करती हैं। मुझे गर्व है कि मैं परिवार के सभी सामाजिक कार्यों में भाग लेती हूं।’ जिंजादे ने कहा कि आंदोलन जोर पकड़ रहा है और अहमदनगर की अकोले तालुका के ब्राह्मणवाड़ा गांव ने विधवाओं के सम्मान और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए कानून बनाने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि जन जागरूकता अभियान के तहत ऑटोरिक्शा पर ‘विधवा प्रथा मुक्त महाराष्ट्र’ के बैनर लगाए जा रहे हैं।

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