
मुंबई: ‘ठाकरे और शिंदे राम और श्याम की जो़ड़ी नहीं, बीजेपी और ओवैसी राम-श्याम की जोड़ी हैं। जहां-जहां बीजेपी को जिताना होता है, ओवैसी वहां पहुंच जाते हैं। सब जानते हैं कि वे बीजेपी की बी टीम हैं। वोट कटाओ मशीन हैं, लेकिन ठाकरे के साथ ऐसा नहीं है। जो लोग छोड़ कर चले जाते हैं, ठाकरे उनकी तरफ पीछे मुड़ कर नहीं देखते हैं।’संजय राउत ने 26 फरवरी को असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान का जवाब दिया जो ओवैसी ने कल ठाणे के मुंब्रा में एआईएमआईएम की सभा में दिया था।
ओवैसी ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे को राम और श्याम की जोड़ी बताते हुए कहा था कि आगे चल कर ये फिर साथ आ जाएंगे। संजय राउत ने ओवैसी के उसी बयान का जवाब दिया है। संजय राउत ने कहा कि ठाकरे गुट अपने पैरों पर मजबूती से खड़ा है और इसे छोड़ कर जाने वालों की जरूरत नहीं है और उनके जाने की परवाह भी नहीं है।
पुणे की कसबा और पिंपरी-चिंचवड की चिंचवड सीट के लिए सुबह मतदान का प्रतिशत कम होने पर पत्रकारों ने जब संजय राउत से सवाल पूछे तो उन्होंने कहा पुणे के लोगों के जीने का एक अलग तरीका है, वैसे भी आज संडे हैं, पुणे के लोग आराम-आराम से घर से निकलते हैं। जैसे-जैसे दिन गुजरता जाएगा, शाम तक वोट पर्सेंटेज बढ़ जाएगा। पुणे के लोग घर पर नहीं बैठेंगे, बड़ी तादाद में मतदान करेंगे।
राउत ने कहा कि वोटिंग के दौरान विवाद और संघर्ष होकर रहेगा क्योंकि सरकार की ओर से कसबा और चिंचवड में मंत्री को भेजकर वहां बैठा दिया गया है. यह दबाव डालने की कोशिश है. हार दिखाई देती है तो बीजेपी इसी तरह के हथकंडे अपना कर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश करती है.
संजय राउत ने कहा, ‘ऐसा बोला जाता है कि सावरकर के विचार पर चलने वाली सरकार आज देश और राज्य में है, लेकिन जैसे ही हम सावरकर को भारत रत्न देने की मांग करते हैं, पता नहीं इन्हें क्यों सांप सूंघ जाता है। वीर सावरकर देश के लिए लड़ने वाले महान क्रांतिकारी थे। देश में क्रांतिकारी की मशाल जलाने वाले सावरकर एक महान नेता थे। उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा वक्त देश के लिए जेल में बिताया। सामाजिक कामों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। बालासाहेब ठाकरे भी सावरकर से प्रेरणा लेते थे। आज की राजनीति में सावरकर का नाम सिर्फ वोट बटोरने के लिए लिया जाता है।वीर सावरकर का अपमान इस देश में कुछ लोग अक्सर करते रहे हैं, अगर उनको जवाब देना है तो तुरंत सावरकर को भारत रत्न देने का ऐलान कीजिए


