
के. सी. महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
मुंबई : भारतेंदु हरिश्चंद्र न केवल एक महान साहित्यकार तथा पत्रकार थे, अपितु वे स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांति के एक महान पुरोधा थे। उन्होंने निज भाषा एवं स्वदेशी की महत्ता पर विशेष जोर दिया. देश हित एवं वर्तमान चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि उनके विचार आज भी प्रांसगिक हैं। उक्त विचार वरिष्ठ साहित्यकार एवं श्री नीलकण्ठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खण्डवा के पूर्व प्राचार्य डॉ. श्री राम परिहार ने के. सी. महाविद्यालय में आयोजित ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र का रचना संसार’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्यक्त किए। इसी क्रम में एचएसएनसी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. हेमलता बागला ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतेंदु जी के जीवन चरित पर प्रकाश डालते हुए उन्हें युगपुरुष बताया।
डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने प्रस्ताविकी प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतेंदु के जीवन से हम सीख सकते हैं कि संपन्नता के बावजूद संत-सा जीवन कैसे जिया जाता है। उन्होंने देशहित में परिस्थतियों से सामंजस्य बिठाते हुए स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाई जाती है। भारतेंदु व्यक्तित्व को हम इसी बात से समझ सकते हैं कि उनका जीवन तो मात्र 34 वर्ष 6 माह का रहा, लेकिन उन्होंने 50 वर्ष के कालखंड को अपने नाम कर लिया। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता डॉ. श्री राम परिहार, डॉ. रेखा शर्मा तथा स्मरजीत पाधी ने किया। संगोष्ठी के दौरान डॉ. मिथिलेश शर्मा, डॉ. सत्यवती चौबे, डॉ. मनीष मिश्रा, डॉ. श्यामसुंदर पांडेय, अंजना विजन एवं डॉ. अनंत द्विवेदी ने प्रपत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी का सम्यक संचालन डॉ. उषा दुबे, डॉ. अजीत कुमार राय, डॉ. सुधीर कुमार चौबे, गायत्री बंका एवं वैशाली संकलेचा ने किया।
भारतीय टीम में चयन होने पर सत्कार
संगोष्ठी के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर मयुर दुमासिया का वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) हेमलता बागला, प्रो. (डॉ.) श्रीराम परिहार एवं प्रो. (डॉ.) शीतला प्रसाद दुबे द्वारा शाल एवं साहित्य भेंट कर सत्कार किया गया। के.सी. महाविद्यालय के एकाउंटस डिपार्टमेंट अध्यापनरत दुमासिया का चयन भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में हुआ है। यह टीम बांग्लादेश के साथ 3 एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला खेलेगी।दुमासिया 2014-15 में एशिया कप की विजेता टीम के हिस्सा रहे हैं।


