
जे. कुमार और एमएमआरडीए अधिकारियों की जांच के आदेश
मुंबई : (Mumbai) मीरा-भाईंदर शहर में मेट्रो-9 परियोजना (Metro-9 project in Mira-Bhayander city) से जुड़े ठेके और खर्च को लेकर विधानसभा के बजट सत्र (budget session of the Legislative Assembly) में बड़ा मुद्दा उठाया गया। स्थानीय विधायक नरेंद्र मेहता (local MLA Narendra Mehta) की मांग पर राज्य सरकार ने मेट्रो परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच कराने के आदेश दिए हैं। मामला ठेकेदार जे. कुमार और एमएमआरडीए अधिकारियों (contractor J. Kumar and MMRDA officials) की भूमिका से जुड़ा बताया जा रहा है।
सदन में जांच की मांग
विधायक नरेंद्र मेहता ने सदन में आरोप लगाया कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों ने मिलकर कई मामलों में निर्धारित दरों से अधिक भुगतान लिया और राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
बॉटल नेक फ्लाईओवर से पहले ही विवाद
मीरा-भाईंदर शहर में एमएमआरडीए द्वारा बनाए गए बॉटल नेक फ्लाईओवर (Bottle Neck Flyover) को लेकर पहले ही विवाद हो चुका है। स्थानीय स्तर पर इसके निर्माण को लेकर आलोचना हुई थी। अब मेट्रो-9 परियोजना से जुड़े खर्च और ठेके को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
चेना गांव की जमीन को लेकर आरोप
मेहता ने आरोप लगाया कि चेना गांव की एक जमीन, जो इको-सेंसिटिव जोन और आदिवासी आरक्षण (eco-sensitive zone and tribal reservation area) क्षेत्र से प्रभावित है, उसका बाजार मूल्य लगभग 20 करोड़ रुपये है। इसके बावजूद एमएमआरडीए से 120 करोड़ रुपये तक किराया वसूलने का मामला सामने आया है, जिसकी जांच जरूरी है।
दहिसर मेट्रो स्टेशन के खर्च पर सवाल
उन्होंने बताया कि दहिसर मेट्रो स्टेशन का मूल टेंडर करीब 43 करोड़ रुपये का था, लेकिन बाद में इसका खर्च बढ़कर लगभग 73 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस लागत वृद्धि के कारणों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
परियोजना में तीन साल की देरी
मीरा-भाईंदर-दहिसर मेट्रो परियोजना को वर्ष 2023 (Mira-Bhayander-Dahisar Metro project) तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक यह कार्य लंबित है। मेहता ने कहा कि तीन साल की देरी के बावजूद ठेकेदार पर किसी प्रकार का दंड नहीं लगाया गया, जो गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उड़ानपुल परियोजना में खर्च कई गुना बढ़ा
मीरा-भाईंदर शहर में चार उड़ानपुलों के निर्माण के लिए करीब 217 करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई थी। आरोप है कि ठेकेदार ने इसके लिए करीब 620 करोड़ रुपये का बिल प्रस्तुत किया है, जिसकी जांच की मांग की गई है।
कासरवडवली-गायमुख पुल पर भी सवाल
मेहता ने यह भी सवाल उठाया कि कासरवडवली-गायमुख उड़ानपुल (Kasarvadavali-Gaimukh Bridge) का ठेका बिना निविदा प्रक्रिया के कैसे दिया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए।
अन्य शहरों में भी उठे समान आरोप
सदन के सभापति तालिका संजय केलकर (House Speaker Talaika Sanjay Kelkar) ने भी ठाणे, कल्याण और डोंबिवली जैसे क्षेत्रों में इसी ठेकेदार से जुड़े समान अनियमितताओं के आरोपों का मुद्दा उठाया और इसकी जांच की जरूरत बताई।
सरकार ने जांच का दिया भरोसा
शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल (Minister of State for Urban Development Madhuri Misal) ने सदन को बताया कि उप मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस ली जाएगी।


