spot_img

Mumbai : मनी लॉन्ड्रिंग के पहले मामले के सभी आठ आरोपित 15 साल बाद बरी

मुंबई : मुंबई की एक विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज मुंबई में पहले मामले में सभी 8 आरोपितों को बरी करने का आदेश जारी कर दिया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान विशेष कोर्ट के जज एमजी देशपांडे ने 15 जुलाई को आदेश जारी किया था, लेकिन आदेश की प्रति बुधवार को विशेष कोर्ट ने जारी की है।

जानकारी के अनुसार मुंबई में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किए गए पहले मामले में सभी आठ आरोपितों को कोर्ट ने दोषमुक्त घोषित कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई के ओपीएम इंटरनेशनल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अन्य 8 आरोपितों के विरुद्ध मनी लॉर्डिंग के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले की सुनवाई 15 अप्रैल को विशेष कोर्ट में हुई थी। उस समय कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपितों को दोषमुक्त घोषित कर दिया था। हालाांकि उस समय सरकारी वकील आरआर यादव ने इस मामले में सभी आरोपितों के मनी लॉड्रिंग मामले में शामिल होने की बात कोर्ट को बताया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपित एनडीपीएस के तहत दर्ज आरोप में निर्दोष साबित हो चुके हैं। इसलिए उनपर मनी लॉड्रिंग का केस लागू नहीं हो सकता है। साथ ही इस मामले से संबंधित कोई सबूत ईडी कोर्ट में पेश नहीं कर सकी है। इसलिए सभी आरोपितों को सबूत के अभाव में निर्दोष बरी किया जा रहा है।

दरअसल, वर्ष 2008 में ईडी ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले के आधार पर ओपीएम इंटरनेशनल के तत्कालीन एमडी ओमप्रकाश नोगजा सहित 8 लोगों के विरुद्ध मनी लॉड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया था। एनसीबी के दर्ज मामले में सभी आरोपित निर्दोष छूट गए थे। इसी आधार पर कोर्ट ने इन सभी आरोपितों को दोषमुक्त करने का आदेश बुधवार को जारी किया है।

आरोपितों के वकील अयाज खान ने बताया कि ओपीएम इंटरनेशनल के तत्कालीन एमडी ओमप्रकाश नोगजा सहित आठ लोगों के विरुद्ध पहले एनसीबी ने मामला दर्ज किया था। इसी मामले के आधार पर ईडी ने भी मामला दर्ज किया था। इस मामले में एनसीबी कोर्ट ने सभी आरोपितों को निर्दोष बरी कर दिया था। इसी वजह से विशेष कोर्ट ने भी सभी आरोपितों को मनी लॉड्रिंग मामले में भी बरी कर दिया है।

Explore our articles