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motivational story : शक्ति का स्रोत

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महाभारत के लिपिकार गणेश जी थे। वेद व्यास बोलते जाते थे और गणेश जी चुपचाप लिखते जाते थे। अंतिम श्लोक लिख चुकने के बाद गणेश जी की निरंतर चलने वाली लेखनी को विश्राम मिलना स्वाभाविक था।

व्यास ने मुस्कराते हुए गणेश जी से पूछा, ‘मैं इतने श्लोक बोलता रहा। अनेकानेक प्रसंग और अनेक व्यवधान इस बीच आए परंतु आप थे, जो सर्वथा मौन साधे रहे। इसका क्या रहस्य है?”

गणेश जी हंसे और बोले, ‘व्यास भगवान! आप जानते हैं कि शक्ति का स्रोत संयम है। आपकी वाणी के ओज को धारण करने के लिए यह मौन आवश्यक था। मौन का महत्व किससे छिपा है। वाणी को सरस्वती माना गया, लेकिन वाणी के संयम को ही सबसे बड़ा संयम भी कहा गया है। जो मौन रहता है, कम बोलता है, वही कुछ कर गुजरता है। इसीलिए मैंने मौन रह कर इस महान ग्रंथ को लिख पाने की साधना पूरी की।’

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नई दिल्‍ली : (New Delhi) केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग (Union Minister of Food Processing Industries, Chirag Paswan) ने आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और समावेशी...

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