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प्रेरक प्रसंग: बिना जाने न बोले

एक बार की बात है। एक आदमी अपने पुत्र के साथ ट्रेन में सफर कर रहा था। पुत्र ने ट्रेन की खिड़की वाली सीट पर बैठने के लिए जिद की। पुत्र को पिता ने उसे खिड़की वाली सीट पर बैठने के लिए दे दी और वह खुद दूसरी सीट पर बैठ गया। आसपास काफी लोग बैठे हुए थे। सबको यह देख कर अच्छा लगा।

अब जैसे ही ट्रेन चलती है लड़का जोर-जोर से चिल्लाने लगता है और कहता है “पिताजी वह देखे है, बादल पीछे जा रहा है”, पिताजी ऊपर देखो हमसे बादल पीछे जा रहे हैं।” पिताजी गाड़ी देखो पीछे निकल रही है, पिताजी पेड़ पीछे जा रहे हैं।” और जोर जोर से चिल्लाता रहा और अजीब हरकतें करता रहा।

वहां पर बैठे सभी लोगों ने उसकी हरकतें देख कर उसे दिमागी रोगी समझ रहे थे। कुछ देर बाद एक व्यक्ति ने उसके पिता से कहा आप इसे क्यों नहीं किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाते। नहीं, पिता का जवाब था। मैं डॉक्टर के पास से ही आ रहा हूं।

यह अंधा था। इसकी आंखें दूसरी लगाई गई है। अब इसे सब कुछ दिखाई दे रहा है। यह उसी प्रकार खुश है जब किसी चिड़िया को पिंजरे से आजाद किया जाता है और वह उड़ कर पूरा आसमान घूमती है। वहां पर बैठे हैं बाकी लोगों ने उसके पिता से माफी मांगी और वह भी उसकी खुशी में शामिल हो गए।

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