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Moradabad : हाईस्कूल फेल संदिग्ध आतंकी अहमद रजा जयपुर के मदरसे में पढ़ा रहा था

मुरादाबाद : यूपी एटीएस द्वारा हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े संदिग्ध आतंकी अहमद रजा को लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हाईस्कूल फेल रजा अपनी पत्नी आसमां और एक साल की बेटी के साथ ही जयपुर में मदरसे में पढ़ा रहा था। गिरफ्तारी से आठ-दस दिन पहले ही वह घर आया था। नए कपड़े सिलाने की बात कहकर घर से निकले अहमद को एटीएस ने करनपुर चौराहे से उठाया था। घर लाकर उसके कमरे में रखी अलमारी से कुछ दस्तावेज, मोबाइल सहित अन्य चीजें और बेटे को अपने साथ लेकर चली गई थी।

मूंढापांडे थाना के प्रभारी निरीक्षक दीपक मलिक ने बताया कि अहमद राज के बारे में पता चला कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन व पाकिस्तान के आतंकी हैंडलर्स के लगातार सम्पर्क में था। अफगानिस्तान में आतंकी कमांडो ट्रेनिंग की ट्रेनिंग लेकर भारत में 15 अगस्त पर कुछ बड़ी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में था। हालांकि इस पर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। एटीएस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ में लगी हुई है। अहमद रजा के तार आतंकी संगठन से जुड़े होने पर स्थानीय पुलिस ने उसके परिवार के बारे में भी जानकारी जुटाई।

प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, अहमद रजा थाना मूंढापाडे क्षेत्र के पोस्ट कांकरखेड़ा ग्राम मिलक गुलड़िया निवासी है। उसका पूरा नाम अहमद रजा उर्फ शाहरुख उर्फ मोहिउद्दीन है। वे दो भाई और तीन बहनें हैं। भाइयों में रजा दूसरे नंबर का है। तीन बहनों में दो विवाहित हैं, जबकि एक छोटी बहन माता-पिता के साथ रहती है। बड़ा भाई सद्दाम और उसकी पत्नी रामपुर में डॉक्टरी करते हैं। छोटा बेटा जुनेद 12वीं पास करके रामपुर में कोचिंग पढ़ रहा है।

अहमद का पिता फिरदौस मूंढापांडे थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसके विरुद्ध कई केस दर्ज हैं। अहमद रजा हाईस्कूल फेल है, लेकिन पत्नी एवं बेटी संग जयपुर के किसी मदरसे में रहकर पढ़ा रहा था। उसकी मां गुड्डो ने बताया कि उसने तलाकशुदा आसमां से निकाह किया था। वह भी अपने बच्चों को छोड़कर आई थी। अहमद ने घरवालों के सामने कभी उसने किसी से कोई संदिग्ध बात नहीं की। गांव में आने पर बच्चों के साथ अधिक वक्त गुजारता था।

मां ने यह भी बताया कि अहमद रजा 12-13 साल की उम्र में ही घर छोड़कर मदरसों में शिक्षा लेने लगा था। पहले वह नियमित घर आता था, लेकिन बीते करीब छह साल से वह केवल त्योहारों या खास मौकों पर ही घर आता था। परिवार और गांव वालों ने बताया कि ईद पर अहमद रजा उर्फ शाहरुख घर आया था। करीब एक-डेढ़ माह यहां रहने के बाद वह जयपुर चला गया था। वहां से आठ-दस दिन पहले ही मुरादाबाद अपने गांव आया था।

उसके परिवार और ग्रामीण उसकी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने से बेखबर थे, जबकि उसके पिता फिरदौस मूंढापांडे थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं। उनके खिलाफ थाने में 16 मुकदमें दर्ज हैं। पुलिस से बचने के लिए वह छत से कूदा तो एक पैर से दिव्यांग भी हो गया है।

उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद मंडल के विभिन्न जिलों से पहले भी आतंकी नेटवर्क के कनेक्शन की बात सामने आ चुकी है। चाहे वह अहमद रजा की गिरफ्तारी का हो या फिर चार साल पहले एनआईए द्वारा अमरोहा से आईएसआईएस के नए माड्यूल हरकत उल हर्ब-ए-इस्लाम के नाम के आतंकी संगठन का खुलासा किया गया था। उस समय एनआईए ने आतंकी संगठन के सरगना समेत पांच आतंकियों की गिरफ्तारी की थी।

जुलाई 2017 में बिजनौर से आतंकियों से संपर्क रखने वाला सफेदपोश गिरफ्तार हुआ था। अप्रैल 2017 में भी बिजनौर से एटीएस ने कई संदिग्ध पकड़े थे। वर्ष 2006 में बनारस के संकट मोचन मंदिर पर हुए बम धमाके के बाद भी अमरोहा का नाम तेजी से चर्चा में आया था। उस समय भी खुफिया एजेंसियों ने अमरोहा के हुदडिया निवासी मुहम्मद सादाब, चिल्ला मुहल्ला के रिजवान को गिरफ्तार किया था। मुहम्मद सादाब शिक्षक और रिजवान सेल्समैनी का काम करता था।

पूछताछ में दोनों ने आतंकियों को पनाह देने की बात कबूल की थी। वर्तमान में दोनों सजा काट रहे हैं। वर्ष 2001 में संसद हमले के आतंकियों ने भी संभल में पनाह लेने की बात स्वीकार की थी। संभल के आरोपित उस युवक को पुलिस ने उस समय जेल भेजा था। जून 2007 में बिजनौर में भारी तादाद में आरडीएक्स से साथ हरकत उल मुजाहिदीन के दो आतंकी गिरफ्तार हुए थे।

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