मीरजापुर : पूर्वांचल को जोड़ने वाले मीरजापुर-औराई मार्ग पर गंगा पर बने शास्त्री सेतु पर सरपट फर्राटा भरने के लिए वाहन चालकों को अभी और इंतजार करना होगा। दरअसल, धीमी गति से कार्य चलने से डेढ़ माह के अंदर अब तक 15 प्रतिशत ही मरम्मत कार्य हो सका है। अब डेढ़ माह ही शेष है यानी चार अक्टूबर तक 85 प्रतिशत मरम्मत कार्य पूर्ण करना होगा। ऐसे में कार्यदायी संस्था कैसे ससमय कार्य पूर्ण करेगी, यह तो समय ही बताएगा। कार्यदायी संस्था को तीन माह के अंदर पुल मरम्मत कार्य पूर्ण करना है।
शास्त्री पुल पर एक वर्ष से बड़े वाहनों का आवागमन बंद है। जबकि छोटे वाहन का संचालन जारी है। इस बीच सेतु निगम ने पुल मरम्मत कराने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा तो शासन ने पुल मरम्मत प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ सात करोड़ 48 लाख रुपये भी जारी कर दिया। पुल मरम्मत की जिम्मेदारी आर एंड एम कंट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मुंबई को दी गई है। कार्यदायी संस्था ने करीब डेढ़ माह पूर्व कार्य शुरू किया, लेकिन अभी तक मात्र 15 प्रतिशत ही कार्य हो सका है। जबकि चार अक्टूबर तक कार्य पूर्ण करना है। धीमी गति से चल रहे कार्य की स्थिति देख वह डेढ़ महीने में कार्य कैसे पूर्ण करेगी, इसकी पुष्टि कोई अधिकारी नहीं कर रहा है।
अपनी आयु पूर्ण कर चुका है शास्त्री पुल
शास्त्री सेतु में कुल 28 स्पैन है। इसके बीच व बीम में कार्बन फाइबर रैपिंग यानी मरम्मत की जानी है। अभी तक छह बीम के मरम्मत का कार्य हो चुका है। हालांकि चार स्पैन खराब नहीं पाए गए हैं। यह सुरक्षित है। शास्त्री सेतु अपनी 40 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका है। इसकी आयु बढ़ाने के लिए यह मरम्मत कार्य हो रहा है, जिससे इस पर बड़े वाहन चल सकें।
1976 में बना था शास्त्री पुल
मीरजापुर-औराई मार्ग पर गंगा नदी पर शास्त्री सेतु 1976 में बनकर तैयार हुआ था। इसमें कुल 28 बीम हैं। इसकी लंबाई एक किलोमीटर है।
ससमय कार्य पूर्ण करने का निर्देश
जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने 11 अगस्त को शास्त्री पुल के मरम्मत कार्य की प्रगति को लेकर बैठक की थी और कार्यदायी संस्था से कहा था कि कार्य धीमी गति से चल रहा है, इसलिए चार्ट के अनुसार कार्य करें। जो कार्य पीछे हैं उनको भी कवर कर लें, जिससे निर्धारित मानक के अनुसार अब तक जो कार्य हो जाने चाहिए वह हो जाए। सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर आरएस उपाध्याय ने बताया कि शास्त्री सेतु के मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। चार अक्टूबर तक कार्य पूर्ण करने का निर्देश कार्यदायी संस्था को दिया गया है।


