मिन्सक : (Minsk) बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको (Belarus President Alexander Lukashenko) ने घोषणा की है कि रूस और बेलारूस की सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास के तौर पर रूसी सामरिक परमाणु हथियारों के लॉन्च का अभ्यास कर रही हैं।
बेलारूस की सरकारी समाचार एजेंसी बेल्टा के (Belarus’s state news agency Belta) अनुसार, देश के चीफ ऑफ स्टाफ ने बताया है कि इन अभ्यासों में रूस का ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल (Russia’s Oreshnik hypersonic missile) भी शामिल है, जिसका पिछले साल यूक्रेन के साथ युद्ध में परीक्षण किया गया था। गौरतलब है कि रूस और बेलारूस पांच दिनों के युद्ध अभ्यास जापाद (पश्चिम) में शामिल हैं। यह युद्धाभ्यास युद्ध में उनकी तत्परता का परीक्षण करने के लिए है। हालांकि यह आसपास के कुछ देशों को चिंतित कर रहा है।
इस बीच पश्चिमी सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि ये यूरोप को डराने के लिए डिजाइन किए गए हैं। ये ऐसे समय में हुए हैं जब पोलैंड और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन नाटो बलों (North Atlantic Treaty Organization) ने पोलैंड की आकाशीय सीमा में घुसपैठ करने वाले रूसी ड्रोन को मार गिराया है। पोलैंड ने एहतियात के तौर पर बेलारूस के साथ अपनी सीमा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
इस बीच लुकाशेंको के मुताबिक यह केवल स्वाभाविक था कि रूसी सामरिक परमाणु हथियार (Russian tactical nuclear weapons) जापाद अभ्यास का हिस्सा बने। उन्होंने कहा “हम वहां हर तरह का अभ्यास कर रहे हैं। वे पश्चिमी देश यह जानते हैं, हम इसे छुपा नहीं रहे हैं। पारंपरिक छोटे हथियारों से लेकर परमाणु हथियार तक अभ्यास में शामिल हैं। फिर हमें यह सब करने में सक्षम होना चाहिए। नहीं तो वे बेलारूस के क्षेत्र में क्यों होंगे?”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा “लेकिन हम बिल्कुल भी किसी को धमकी देने की योजना नहीं बना रहे हैं”। बेलारूस के रक्षा मंत्रालय ने (The Belarus Defense Ministry) भी पुष्टि की है कि रूसी मध्यम दूरी वाले ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल की तैनाती के साथ अभ्यास किया गया था, जिसे रूस ने पिछले साल 21 नवंबर को यूक्रेन पर पहली बार दागा था।
गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने पिछले साल के अंत में कहा था कि रूस 2025 की दूसरी छमाही में बेलारूस के क्षेत्र में ओरेश्निक तैनात कर सकता है। बेलारूस रूस का करीबी सहयोगी है और यूक्रेन और रूस के साथ नाटो सदस्य देशों पोलैंड, लिथुआनिया और लातविया की सीमा साझा करता है। साथ ही वह रूसी सामरिक परमाणु हथियारों का महत्वपूर्ण ठिकाना भी है, जिसका नियंत्रण और कमांड रूस में मॉस्को से निर्धारित होता है।


