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Lucknow : यूपी में भी चल रही है जोड़-तोड़ की सियासत!

Lucknow: The politics of manipulation is going on in UP too!

अखिलेश ने महाराष्ट्र की तर्ज पर फेंका बड़ा पासा
लखनऊ: (Lucknow)
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बड़े सियासी उलटफेर को लेकर चुनावी बिसात बिछाई जा रही है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘सौ विधायक लाओ और मुख्यमंत्री बन जाओ’ के बयान के बाद सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इसे महज चुनावी तंज ही मानकर चल रहे हैं। सिर्फ सौ विधायक ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों प्रतीकात्मक तौर पर मुस्लिमों के लिए प्रयोग की जाने वाले ‘अब्दुल’ की भी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।

आजम के बयान पर चर्चा
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान ने जब से यह बयान दिया, ‘अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा, बल्कि पोंछा लगाएगा’, तभी से सियासी गलियारों में खासकर मुस्लिम समुदाय में इस बात की चर्चाएं सबसे ज्यादा हो रही हैं, क्या मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी को बचाने के लिए आजम खान ने इस तरीके का बयान दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दरअसल उत्तर प्रदेश में बसपा ने कुछ हिस्से में मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपने साथ जोड़कर कर समाजवादी पार्टी के राजनैतिक समीकरणों को बिगाड़ने की कोशिश भी की है। इसी वजह से आजम खान का यह बयान सियासी गलियारों में हलचल मचा रहा है।उत्तर प्रदेश में हो रहे विधानसभा और लोकसभा के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने सियासत की बिसात पर सिर्फ अब्दुल का ही दांव नहीं चला है। बल्कि सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने भी तंज कसते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के दोनों मुख्यमंत्रियों को सौ-सौ विधायक लाकर मुख्यमंत्री बनाने का वादा कर डाला। उत्तर प्रदेश की सियासत को करीब से समझने वालों का कहना है कि अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों के लिए ऐसा वादा करके सियासी तंज ही कसा है। लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी खूब हो रही है कि अखिलेश यादव ने भले ही तंज कसा हो, लेकिन उन्होंने राजनीतिक परिदृश्य पर जोड़-तोड़ की राजनीति के लिए एक तरह से ओपन ऑफर तो दे ही दिया है।

अखिलेश का पॉलिटिकल सिग्नल
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि भले ही सौ विधायकों को लाकर मुख्यमंत्री पद का ऑफर अप्रत्याशित सा लगता हो, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ हुआ इस तरह से ही था। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तो इस बात की होने ही लगी हैं कि क्या उत्तर प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि में भी जोड़-तोड़ की गुणा-गणित चल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब एक पूर्व मुख्यमंत्री खुले मंच से इस तरीके का बयान देते हैं, तो उसके सियासी मायने तो निकाले ही जाते हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ। उद्धव ठाकरे की पार्टी के विधायकों को तोड़कर विधायक भाजपा से मिले और फिर भाजपा के सहयोग से सरकार बना कर मुख्यमंत्री बन गए। ठीक उसी तर्ज पर अखिलेश यादव ने भी चुनावी रैली में इस बात का जिक्र करके एक बड़ा पॉलिटिकल सिग्नल तो दिया ही है।

वहीं रामपुर में सपा नेता आजम खान ने मुस्लिम समुदाय को एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के पक्ष में वोट देने की ‘अब्दुल अब पोंछा लगाएगा’ जैसे वायरल बयान से अपील की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से समझने वाले राजनीतिक विश्लेषक एसएन ओझा कहते हैं कि समाजवादी पार्टी के नेताओं की ओर से जारी किए जाने वाले ऐसे बयानों को सियासत की तस्वीर के साथ ही जोड़कर देखा जाना चाहिए। ओझा कहते हैं कि आजम खा ने अब्दुल के पोछा लगाने वाली बात कह कर पूरे मुस्लिम समुदाय को एक संदेश देने की कोशिश की है, उनको एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान करना चाहिए और उसी पार्टी से जुड़े रहना चाहिए।

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