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Lok Sabha Elections : मुजफ्फरनगर से पिता चरण सिंह के बाद पुत्र अजित सिंह ने भी खाई मात

मेरठ : (Meerut) पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चर्चित मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट (famous Muzaffarnagar Lok Sabha seat of western Uttar Pradesh) भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है। इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के जाट नेता डॉ. संजीव बालियान तीसरी बार चुनाव मैदान में है। मुजफ्फरनगर की सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को पहले ही लोकसभा चुनाव में करारी हार मिली थी तो इसके बाद उनके बेटे अजित सिंह भी मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव हार गए।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद को गन्ने की राजनीति का केंद्र माना जाता है। भारतीय किसान यूनियन का उदय भी मुजफ्फरनगर जनपद से हुआ और भाकियू अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत गन्ने की राजनीति के बल पर राष्ट्रीय क्षितिज पर छा गए। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1971 में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से ही लड़ा और पहले ही चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ठाकुर विजयपाल सिंह से करारी हार का सामना करना पड़ा। जबकि चौधरी चरण सिंह उस समय तक उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके थे। इस हार के बाद चरण सिंह फिर से चुनाव लड़ने के लिए मुजफ्फरनगर नहीं आए। इस सीट चौधरी चरण सिंह के परिवार के लिए हमेशा हार का सबब बनी है। 2019 में समाजवादी पार्टी-राष्ट्रीय लोकदल-बहुजन समाज पार्टी गठबंधन से चौधरी चरण सिंह के पुत्र चौधरी अजीत सिंह ने भी चुनाव लड़ा, लेकिन अपने पिता की तरह उन्हें भी भाजपा के डॉ. संजीव बालियान ने हरा दिया। इस हार से पहले अजित सिंह केंद्र सरकार में कई बार कैबिनेट मंत्री रह चुके थे। मुजफ्फरनगर से पहले 2014 में अजित सिंह को बागपत लोकसभा सीट से भी हार का सामना करना पड़ा।

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