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जीवन ऊर्जा: जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए उतार-चढ़ाव बहुत जरुरी हैं

रतन नवल टाटा एक भारतीय उद्योगपति और टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष हैं। उनका जन्म 28 दिसंबर, 1937 में हुआ था। वे 1990 से 2012 तक टाटा समूह के अध्यक्ष भी थे। इसके साथ ही वे अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक अंतरिम अध्यक्ष के रूप में भी काम कर रहे थे। वे इसके धर्मार्थ ट्रस्टों के प्रमुख हैं। 2000 में उन्हें पद्म भूषण प्राप्त करने के बाद, 2008 में, उन्हें भारत में दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण मिला। टाटा शिक्षा, चिकित्सा और ग्रामीण विकास के समर्थक हैं, और भारत में एक अग्रणी परोपकारी माने जाते हैं।

मैं सही फैसले लेने में यकीन नहीं रखता; बल्कि मैं फैसले लेकर, उन्हें सही साबित करता हूं। दुनिया में करोड़ो लोग मेहनत करते है। फिर भी सबको अलग-अलग परिणाम प्राप्त होते है। इस सब के लिए मेहनत करने का तरीका जिम्मेदार है। इसलिए व्यक्ति को मेहनत करने के तरीके में सुधार करना चाहिए। अगर आपको तेज चलना है, तो अकेले चलिए; लेकिन अगर दूर तक चलना है, तो साथ-साथ चलना होगा। उन सारे पत्थरों को अपने पास रख लें, जिसे लोग आप पर फेकते हैं और उन पत्थरों का प्रयोग एक मजबूत स्मारक बनाने में करे। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए उतार-चढ़ाव बहुत जरुरी हैं, क्योंकि ईसीजी में भी सीधी लाइन का मतलब होता है कि हम जिंदा नहीं हैं। हो सकता है कि मेरे निर्णयों से कई लोग दुःखी हो; लेकिन मैं उस व्यक्ति के रूप में पहचाना-जाना चाहता हूं जिसने कभी किसी भी परिस्थिती में सही काम को सही ढ़ग से करने के लिए समझौता नहीं किया। सत्ता और धन मेरे दो प्रमुख सिद्धांत नहीं हैं। ऐसी कई चीजें हैं, जो अगर मुझे दोबारा जीने के मौका मिले तो शायद मैं अलग ढंग से करूंगा। लेकिन मैं पीछे मुड़कर ये नहीं देखना चाहूंगा कि मैं क्या नहीं कर पाया। मैं हमेशा भारत के भविष्य की क्षमता के बारे में बहुत उत्साहित और विश्वस्त रहा हूं; मेरा मानना है कि यह महान क्षमताओं वाला एक महान देश है। दूसरों की नकल करने वाले व्यक्ति थोड़े समय के लिए सफलता तो प्राप्त कर सकते है; परंतु जीवन में बहुत आगे नहीं बढ़ सकते है। मैं लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार कहता हूं कि प्रश्न पूछें, नए विचारों पर बात करें, नई तकनीक और नए आईडिया के बारें बेझिझक आगे आएं। हम लोग इंसान है, कोई कंप्यूटर नहीं; जीवन का मजा लीजिये इसे हमेशा गंभीर नहीं बनाइये। लोग तुम्हारे स्वाभिमान की परवाह तब तक नहीं करेंगे। जब तक की तुम खुद को साबित करके नहीं दिखा देते। जीवन में केवल अच्छी शैक्षिक योग्यता या अच्छा कैरियर ही काफी नहीं है; आपका लक्ष्य होना चाहिए कि एक संतुलित और सफल जिंदगी जी जाए।

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