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सिमोन द बोवुआर का पत्र एल्बोन के नाम

मैंने तुमसे ‘आई लव यू’ कहने में इतनी देर क्यों लगाई !

‘द सेकेंड सेक्स’ से तहलका मचा देने वाली फ्रांस की मशहूर लेखिका सिमोन द बोवुआर (1908-1986) का लेखन ही नहीं, जीवन-शैली भी परंपराओं से हटकर रही। अमेरिकी उपन्यासकार नेल्सन एल्ग्रेन के साथ उनका प्रेम-संबंध बना और बीच-बीच में लंबी जुदाइयों के बावजूद कई वर्षों तक चलता रहा।

रविवार, 18 मई, 1947

मेरे बहुमूल्य, प्यारे शिकागो पुरुष

मैं पेरिस में तुम्हारे बारे में सोच रही हूं, तुम्हें पेरिस में ‘मिस’ कर रही हूं। पूरी यात्रा बड़ी शानदार रही। पूर्व में पहुंचने के बाद हमारे पास करीब-करीब एक भी रात नहीं थी। न्यूफाउंडलैंड में सूर्य अस्त होने जा रहा था, और पांच घंटे बाद हमने शनोन में इसे उदय होते देखा। सब कुछ इतना खूबसूरत था, और मेरे पास सोचने के लिए इतना कुछ था कि मैं मुश्किल से ही कुछ देर सोई। आज सुबह 10 बजे (तुम्हारी घड़ी में तब 6 बज रहे होंगे) मैं पेरिस में थी। मुझे लगा था कि पेरिस का सौंदर्य मेरी उदासी को कुछ कम कर देगा, पर ऐसा हुआ नहीं। पहली बात तो यह कि पेरिस आज उतना खूबसूरत नहीं है। यह भूरा और धुंधला है, आज रविवार है और सड़कें सुनसान हैं, सब कुछ रंगहीन, अंधकारपूर्ण और मृत जान पड़ता है। या शायद यह मेरा दिल है, जो पेरिस में मृत महसूस कर रहा है। यूं मेरा दिल अब भी न्यूयॉर्क में है – ब्रॉडवे के उस मोड़ पर जहां हम दोनों ने एक-दूसरे को ‘अलविदा’ कहा था या शिकागो के मेरे उस घर में, तुम्हारे प्रेम भरे दिल के उस गर्म कोने में।

शायद दो-तीन दिन बाद मैं कुछ सामान्य महसूस कर पाऊं। फ्रांस का साहित्यिक और राजनीतिक जीवन, मेरा काम और मेरे मित्र शायद फिर से मेरी जिंदगी का हिस्सा बन जाएं, लेकिन फिलहाल तो इनमें से किसी भी चीज में मेरी जरा भी दिलचस्पी नहीं है। मैं बहुत सुस्त और थकी-थकी महसूस कर रही हूं और यादों के अलावा और कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा। मेरे प्रिय पुरुष, मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैंने तुमसे ‘आई लव यू’ कहने में इतनी देर क्यों लगाई। शायद मैं पक्का यकीन कर लेना चाहती थी और आसान तथा खोखले शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहती थी। पर मुझे लग रहा है कि प्रेम की यह भावना बहुत शुरू में ही जाग चुकी थी। जो भी हो, अब तो वह यहां बड़ी मजबूती से पैठ चुकी है। यह प्रेम है और मेरा दिल इस प्रेम से तड़प रहा है। मुझे खुशी है कि में इतनी दुखी हूं, क्योंकि मैं जानती हूं कि तुम भी दुखी हो और हम दोनों का यह एक-सा दुख एक बड़ा मीठा अनुभव है। तुम्हारे साथ जुड़ा आनंद प्रेम का प्रतीक था और अब तुम्हारे साथ जुड़ी यह पीड़ा भी प्रेम का प्रतीक है। प्रेम के हर रूप को अनुभव करना जरूरी है। हम लोग पुनर्मिलन के आनंद को भी अनुभव करेंगे। मुझे इसकी चाह भी है और जरूरत भी और मैं इसे पा भी लूंगी। मेरी प्रतीक्षा करो। मैं भी तुम्हारी प्रतीक्षा में हूं। जितना मैंने तुमसे कहा होगा, और जितना तुमने जाना होगा, मैं उससे कहीं ज्यादा तुमसे प्यार करती हूं। मैं तुम्हें पत्र लिखती रहूंगी। तुम भी मुझे पत्र लिखते रहना। मैं हमेशा-हमेशा के लिए तुम्हारी पत्नी हूं।

तुम्हारी सिमोन

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