बांग्ला लेखक श्री विभूतिभूषण वंद्योपाध्याय अपने आत्मकथात्मक उपन्यास ‘पथेर पंचाली के लिए विश्व-विख्यात हैं। उनकी इस कृति पर फिल्मकार सत्यजीत रे ने इसी नाम से फिल्म बनाई, जो दुनिया भर में सराही गई। रमा चट्टोपाध्याय विभूतिभूषण की दूसरी पत्नी थीं। विवाह पूर्व विभूतिभूषण ने रमा देवी को कई चिट्ठियां लिखीं। प्रस्तुत पत्र उनमें से एक है।
मेरे मन के वेदना का सुर बज रहा था
सोमवार, 15 अग्रहायण।
पहला दिसम्बर, 41
प्रियतमासु,
आज ही सबेरे की ट्रेन से वनगांव से आया हूं। कल तुम्हारा घर बदल लिया गया- कानू मामा उसके लिए गए थे। सामान भी सब पहुंचा दिया गया, रात नौ बजे के बाद हम लोग जगहरि शा की कन्या के विवाह का निमंत्रण था, तो खाना खाने गए – यतीन दा, मन्मथ दा और मैं। खाकर आने के बाद हम लोगों ने घर बदला, अर्थात् सोने गए नए घर में। ‘जाने के पहले अपने छोटे कमरे में आकर एक बार खड़ा हुआ। खिड़की से आकर कमरे में ‘ज्योत्स्ना पढ़ रही थी, निर्जन कमरा कारण बेलू, दूनू, खोका आदि सभी लोग जगहरि के घर से तब भी लौटे नहीं थे। मुझे तो सिर्फ़ यह लग रहा था, जिस किशोरी के साथ इस छोटे कमरे का अत्यंत घनिष्ठ और मधुर संबंध है, जिसकी कितने दिनों की बातें हैं, झगड़ा, बकझक आदर, प्रेम, हंसी और रुदन इस कमरे की आबो-हवा के साथ मिले हुए हैं, वह मानो मात्र इन्हीं रूपों में यहां थी, वह कहां चली गई, हो सकता है अभी आ जाए। ज्योत्स्ना के प्रकाश में कितने क्षणों तक उसकी नीरव प्रतीक्षा में अकेला खिड़की के पास खड़ा रहा, अर्ध अंधकार में भोजन के कमरे के फ़र्श पर उसकी पदचाप सुनने की प्रत्याशा कर रहा हूं, जैसे हर क्षण किंतु वह कहां आई? सचमुच में मन को इतना कष्ट हुआ! जैसे घर में किसी को छोड़ कर जा रहा हूं – गत एक व कितने दिन, कितनी रातों की उद्वेगहीन बैठकों, जिसकी बड़ी-बड़ी आंखों की दृष्टि ने मेरी विसंगता को दूर किया है – मन में आनंद जगाया है। कल्याणी, परसों हमारे विवाह का दिन है। मुझे याद है। कल चिट्ठी डाक में डालने से, हमारे विवाह के दिन, प्रभात में वह चिट्ठी तुम्हारे हाथों में होगी। दूरागत वाद्यसंगीत की तरह ध्वनित हो उसमें हमारे गत एक वर्ष के हंसी-खुशी भरे गीत और गपशप, प्रत्यासन्न मिलन – यामिनी की तरह आनंद से मुखरित हो उठें, उसका हरेक परिच्छेद – जिस आनंद ने सृष्टि के आरंभ से ही नर और नारी के मध्य परस्पर परिचय के पथ पर विचित्र सेतु की रचना कर रखी है, जो कभी आलस्य को नहीं लाता है, मन में जगाता रहता है शक्ति और उत्साह। आज कलकत्ते में एक बड़ी.. दुर्घटना हो गई। दोपहर में कई एरोप्लेन के खेल कौशल के प्रदर्शन का अभ्यास कर रहे थे, उनमें से एक ‘एरोप्लेन डुबकी मारते समय हठात् बड़े बाजार में आमड़ातला की गली में गिर कर चूर-चूर हो गया। सुना है दो पायलट मारे गए हैं। एक समाचार और है, मंत्रिमंडल ने आज त्यागपत्र दे दिया है। इन दो घटनाओं से शहर में बड़ी हलचल है। मेरी प्रीति और शुभकामना ग्रहण करो। नूट, बउमा, उमा, शांति और राजेन को स्नेहाशीवार्द देना।
विभूतिभूषण


