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Laghu Udyog Bharti: संगठन बना छोटे-मंझोले उद्योगों की आवाज, सरकार से कराए बड़े-बड़े काम

भोपाल:(Laghu Udyog Bharti) देश के जिस राज्य में निजी सेक्टर जितने अधिक रोजगार पैदा कर रहा है, वहां उतना ही अधिक सामाजिक सुख है। इसके लिए सभी राज्य सरकारें उद्योग जगत के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं लेकर आती हैं। इसमें तमाम संगठनों के अपने प्रयास भी हैं जो सरकार, समाज और उद्योग जगत के बीच सेतु का कार्य करते हैं। इन सभी के बीच छोटे व्यापारियों के हित में काम कर रही लघु उद्योग भारती (लउभा) मध्य प्रदेश में इन दिनों एक ऐसे संगठन के रूप में उभरी है जिसने शिवराज सरकार से अनेक योजनाओं को लागू कराने में सफलता प्राप्त की है। परिणाम स्वरूप प्रदेश ने आज आर्थिक प्रगति की वह राह पकड़ी है, जिस पर चलकर मप्र देश के तमाम राज्यों के बीच प्रगति की तेज दौड़ लगा रहा है।

मामला ऑनलाइन अपडेशन का हो, दाल मिलों, टेक्सटाइल्स उद्यमियों, प्लास्टिक अपशिष्ट, मंडी एक्ट में संशोधन, फैक्ट्री एक्ट लाइसेंस, सोलर प्लांट, स्टार्टअप, प्रतिभूति, भंडार क्रय नियम, प्रदेश फैसिलेशन काउंसिल, बैंक चार्ज, प्लाट आवंटन, अनुदान राशि, माइनिंग, दलहनों पर मंडी टैक्स की छूट, पेमेंट करने संबंधी नियम या अन्य ऐसे विषय ही क्यों न हों, जिनमें जनता और छोटे उद्योगपतियों दोनों का लाभ होता है, इन सभी में आज बड़ी सफलता राज्य में लघु उद्योग भारती के किए गए प्रयासों से मिली है।

लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड का गठन एक बड़ी उपलब्धि

लउभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश गुप्ता ने खास बातचीत में बताया कि कैसे मप्र में छोटे व्यापारियों और उद्योगपतियों के हित में निर्णय लेकर लघु उद्योग भारती उद्योग जगत की एक श्रेष्ठ संस्था बनी है। यह संगठन का ही प्रयास था जो बंद हो चुके लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड का गठन संभव हो पाया। पिछले 25 से 30 वर्षों से लंबित प्रदेश के दाल मिलों को नारंगी श्रेणी से हरी श्रेणी में रखने का प्रस्ताव शासन ने स्वीकृत किया । इसी तरह से प्रदेश में स्थित टेक्सटाइल्स उद्यमियों की मांग पर यार्न (रेशा) एवं टेक्सटाइल्स यूनिटों को नारंगी से हरी श्रेणी में रखा जा सका, प्रदेश के बाहर से आ रहे दलहनों पर मंडी टैक्स की छूट दी गई। प्रदेश में प्रदूषण विभाग के साथ छोटे उद्योगों को लेकर खड़े होनेवाले विवादों के निपटान एवं संवाद के लिए विश्वास स्कीम प्रारंभ हुई।

श्रम विभाग ने किए नियमों में आवश्यक संशोधन

गुप्ता कहते हैं, लउभा ने 1973 में बने मंडी एक्ट में संशोधन कर ऑनलाइन ई अनुज्ञा सत्यापन प्रक्रिया शुरू कराई है। अब प्रदेश के हजारों दाल दलहन उद्यमियों को कृषि उपज मंडी समिति कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते । एचडीईपी पाइप की निवेश में 25 करोड़ टर्नओवर तीन वर्ष अनुभव की बाध्यता समाप्त करने की मांग शासन द्वारा मान ली गई। फैक्ट्री एक्ट लाइसेंस प्रक्रिया में सुधार एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा सकती है। श्रम विभाग द्वारा फैक्ट्री एक्ट लाइसेंस जारी दिनांक से एक वर्ष के लिए कर दिया गया है।

शासन ने 50 परसेंट खरीदी लघु उद्योग निगम द्वारा अनिवार्य की

राज्य शासन द्वारा बजट 2022-23 में स्टांप शुल्क घटाने का प्रावधान हुआ। प्रदूषण विभाग द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट के लिए फीस रुपए पांच हजार से घटाकर दस हजार कर दी गई। लउभा के अध्यक्ष गुप्ता ने बताया, किसी भी प्रदेश में जितने अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम रहते हैं, वहां उतने अधिक लोगों तक रोजगार पहुंचता है। इस दिशा में लघु उद्योग भारती की लगातार मांग पर राज्य सरकार द्वारा टेंडर प्रक्रिया में 50 परसेंट खरीदी लघु उद्योग निगम द्वारा प्रदेश के उद्यमियों से खरीदना अनिवार्य कर दिया, इसका परिणाम यह हुआ कि राज्य में छोटे-मंझोले उद्योगों को विस्तार देने की संभावना और अधिक बढ़ गई।

हमारी मांग पर सरकार डिस (डीआईसी) और औद्योगिक क्षेत्र में प्लाट आवंटन ऑनलाइन ऑप्शन से समाप्त कर पहले पाई। इसी तरह से राज्य शासन द्वारा निविदा उपार्जन में दी जाने वाले प्रतिभूति केंद्र सरकार की तरह एमएसएमई के लिए शून्य कर दी गई है एवं निष्पादन प्रतिभूति अधिकतम तीन प्रतिशत कर दी गई है।

बुरहानपुर, उज्जैन, देवास में नए क्लस्टर स्वीकृत

महेश गुप्ता कहते हैं कि हमारी मांग पर ध्यान देते हुए शिवराज सरकार ने संशोधित भंडार क्रय नियम में प्रदेश के एमएसएमई के लिए 25 परसेंट से 50 परसेंट तक आरक्षण एवं उन्हें एल वन 15 प्रतिशत की सीमा में दरे प्रस्तुत करने की सुविधा प्रदान की। सरकार द्वारा सोलर प्लांट उपयोग पर पूर्व में 30% क्षमता से बढ़कर 70% का नोटिफिकेशन जारी किया है। छोटे उद्यमियों को रोजगार प्रारंभ करने के लिए बुरहानपुर, उज्जैन, देवास में नए क्लस्टर स्वीकृत किए गए, जिसमें अब उद्योग स्थापना संबंधी प्रक्रिया तेजी से की जा रही है।

सरकार ने दिया 436 इकाइयों को 736 करोड़ का अनुदान

इतना ही नहीं, शिवराज सरकार ने प्रदेश की 436 इकाइयों को 736 करोड़ रुपए का अनुदान एक वर्ष में सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदान कर दिया, यह प्रदेश भर के उद्यमियों के लिए बड़ी राहत का विषय है। गुप्ता ने बताया कि खदान चलाने के लिए माइनिंग प्लान की स्वीकृति आवश्यक है किंतु पिछले काफी वक्त से प्रदेश के माइनिंग विभाग में टेक्निकल डायरेक्टर ही नियुक्ति नहीं था, इस दिशा में प्रयास हुए तो सरकार ने नए टेक्निकल डायरेक्टर की नियुक्ति कर दी, जिसके कारण से आज खनिज उद्यमियों द्वारा अपने माइनिंग प्लान को स्वीकृत कराना नियमित हो गया।

केंद्र की मोदी सरकार ने भी बदले अपने कई नियम

गुप्ता बोले कि लघु उद्योग भारती के प्रयासों से प्रदेश में ही नहीं केंद्र सरकार भी अपने नियमों में बदलाव कर रही है। उसने हाल ही में एमएसएमई उद्यमियों के लिए 45 दिन में अनिवार्य रूप से पेमेंट करने संबंधी नियम एक अप्रैल 2023 से लागू कर दिया गया जिससे छोटे-छोटे उद्योगों को भविष्य में बहुत अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। लउभा द्वारा आरबीआई की बैठकों में लगातार क्रेडिट गारंटी फंड

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