
कोलकाता : (Kolkata) कोलकाता की प्रतिष्ठित और प्रभावशाली बालीगंज विधानसभा (Kolkata’s prestigious and influential Ballygunge Assembly seat) सीट पर 2026 के चुनाव में मुकाबला एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Trinamool Congress and the Bharatiya Janata Party) आमने-सामने हैं। इस सीट से तृणमूल ने शोभनदेव चटर्जी को (Sobhandeb Chattopadhyay) मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने डॉ. शतरूपा (Dr. Shatarupa) पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने रोहन मित्रा को उम्मीदवार बनाया है और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से आफरीन बेगम (Congress has nominated Rohan Mitra as its candidate, and Afreen Begum is contesting on behalf of the Marxist Communist Party) चुनाव लड़ रही हैं, हालांकि चुनावी तस्वीर में मुख्य मुकाबला तृणमूल और भाजपा के बीच ही सिमटता नजर आ रहा है।
चुनावी माहौल के बीच भाजपा उम्मीदवार शतरूपा का कहना है कि बालीगंज ही नहीं, पूरे राज्य में ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ माहौल बन चुका है और इस बार बदलाव तय है। इसके जवाब में तृणमूल उम्मीदवार शोभनदेव चटर्जीने दावा किया कि राज्य सरकार ने आम लोगों के हित में जो काम किए हैं, उनके आधार पर पार्टी एक बार फिर बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी और बालीगंज में जीत दोहराई जाएगी।
इतिहास और चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो बालीगंज सीट लंबे समय तक वामपंथ का गढ़ रही, जहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (Marxist Communist Party) ने नौ बार जीत दर्ज की और 1977 से 2001 तक लगातार सात बार यहां विजय हासिल की। कांग्रेस ने तीन बार जीत दर्ज की, जबकि अन्य दलों की जीत सीमित रही। हालांकि 2006 के बाद से इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा कायम है और पार्टी लगातार पांच चुनाव जीत चुकी है, जिसमें 2022 का उपचुनाव भी शामिल है। यह उपचुनाव पूर्व विधायक सुब्रत मुखर्जी (demise of former MLA Subrata Mukherjee) के निधन के बाद हुआ था, जिसमें बाबुल सुप्रियो ने जीत दर्ज कर सीट पर तृणमूल का कब्जा बरकरार रखा।
पिछले चुनावों के नतीजे भी इस सीट पर तृणमूल की मजबूत पकड़ को दिखाते हैं। 2011 में सुब्रत मुखर्जी ने माकपा उम्मीदवार को 41 हजार 185 वोटों से हराया था, 2016 में कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ 15 हजार 225 वोटों से जीत दर्ज की और 2021 में भाजपा उम्मीदवार को 75 हजार 359 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। 2022 के उपचुनाव में बाबुल सुप्रियो ने माकपा उम्मीदवार को 20 हजार 228 वोटों से हराकर बढ़त बनाए रखी।
लोकसभा चुनावों में भी इस क्षेत्र में तृणमूल की बढ़त लगातार बनी रही है। 2014 में पार्टी ने भाजपा पर 14 हजार 352 वोटों की बढ़त बनाई थी, जो 2019 में बढ़कर 54 हजार 452 और 2024 में 56 हजार 113 हो गई। हालांकि 2014 के बाद भाजपा ने वामपंथ और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्ष के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन तृणमूल के वर्चस्व को अभी तक तोड़ नहीं सकी है।
बालीगंज पूरी तरह शहरी सीट है और कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां कुल सात नगर निगम वार्ड शामिल हैं। 2024 के आंकड़ों के अनुसार यहां दो लाक 53 हजार 70 मतदाता हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय लगभग 50.80 प्रतिशत के साथ सबसे प्रभावशाली है, जबकि अनुसूचित जाति मतदाता करीब 3.50 प्रतिशत हैं। मतदान प्रतिशत पिछले वर्षों में 60 से 67 प्रतिशत के बीच रहा है, जो शहरी क्षेत्रों के औसत रुझान को दर्शाता है।
यह इलाका ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है और ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) के दौर से विकसित होकर आज एक प्रमुख शहरी और सांस्कृतिक केंद्र बन चुका है। यहां की अर्थव्यवस्था वित्त, पेशेवर सेवाओं, शिक्षा, आतिथ्य और खुदरा कारोबार पर आधारित है। गरियाहाट मार्केट, रवींद्र सरोवर, बिरला मंदिर और बोस इंस्टीट्यूट जैसे प्रमुख स्थल इस क्षेत्र की पहचान हैं। मेट्रो कनेक्टिविटी, बेहतर सड़कों और शैक्षणिक संस्थानों के कारण यह इलाका कोलकाता के सबसे विकसित क्षेत्रों में गिना जाता है।
कुल मिलाकर, बालीगंज सीट पर तृणमूल कांग्रेस की मजबूत पकड़ अब भी बरकरार है और 2026 के चुनाव में भी पार्टी बढ़त की स्थिति में नजर आ रही है। भाजपा ने जरूर अपनी मौजूदगी मजबूत की है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उसे तृणमूल के गढ़ को भेदने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे, जबकि वाम-कांग्रेस उम्मीदवार अभी भी अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे हैं।


