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Kathmandu : भारत से 100 रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी के लिए नेपाल के नाकों पर सख्ती बढ़ी

Kathmandu: Increased Strictness at Nepal's Checkpoints Regarding Customs Duty on Goods Worth Over ₹100 from India

काठमांडू : (Kathmandu) भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान की खरीद पर अनिवार्य रूप से सीमा शुल्क (customs duty) लागू किए जाने के बाद सीमावर्ती नाकों पर तनाव बढ़ गया है। कस्टम कार्यालय के सामने तैनात जांचकर्मी आम लोगों के बैग की तलाशी तेज कर रहे हैं। इस दौरान सामान को लेकर छीना-झपटी और खींचतान की घटनाएं हो रही हैं और बीच-बीच में झड़प भी हो रही है।

वीरगंज स्थित नेपाल-भारत सीमा क्षेत्र (Nepal-India border region) में सशस्त्र पुलिस ने पिछले बुधवार से माइकिंग के जरिए लोगों को नए नियम की जानकारी देना शुरू किया था। शुक्रवार से 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य शुल्क वसूली शुरू कर दी गई है। एक सशस्त्र पुलिस अधिकारी ने बताया कि दो दिन तक लोगों को जानकारी दी गई, उसके बाद सख्ती लागू की गई।

सीमा सुरक्षा में तैनात सशस्त्र पुलिस माइकिंग के जरिए यह घोषणा कर रही है कि 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान को शुल्क चुकाए बिना अंदर नहीं लाया जा सकता, लेकिन महंगाई के बीच सीमावर्ती बाजारों में खरीदारी पर सख्ती किए जाने से आम लोग नाराज हैं। तलाशी के दौरान सुरक्षाकर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

नाकों पर सख्ती बढ़ने के बाद सीमा पार जाकर खरीदारी करने वालों की संख्या घटने लगी है और भारतीय सीमावर्ती बाजार सूने पड़ते जा रहे हैं। कुछ नेपाली व्यापारी इस सख्ती को सकारात्मक मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे अव्यावहारिक बताते हुए 100 रुपये की सीमा पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय नेताओं का कहना है कि व्यावहारिक पहलुओं की अनदेखी के कारण यह समस्या पैदा हुई है और छोटे व्यापारियों व आम उपभोक्ताओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।

वीरगंज कस्टम के प्रमुख कृष्णप्रसाद मैनाली (Krishna Prasad Mainali, Chief of the Birgunj Customs Office) ने कहा कि पर्याप्त सूचना देने के बाद ही नियम लागू किया गया है। उनका कहना है कि लोगों को परेशान करने का उद्देश्य नहीं है, बल्कि पहले जागरूक करना और फिर नियम लागू करना नीति है। भैरहवा कस्टम प्रमुख हरिहर पौडेल के अनुसार घरेलू उपयोग के नाम पर बड़े पैमाने पर हो रहे आयात और तस्करी को रोकने के लिए सख्ती की गई है। हालांकि सामान्य मात्रा में लाए जाने वाले घरेलू सामान पर सख्ती नहीं की जा रही है।

कंचनपुर के गड्डाचौकी कस्टम में भी गुरुवार से 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य घोषणा और राजस्व भुगतान की व्यवस्था लागू की गई है। कुछ लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कई इसे अनावश्यक और अव्यावहारिक बता रहे हैं। सशस्त्र पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार के निर्देश के अनुसार ही सीमा पर सख्ती की जा रही है और अवैध आयात रोकने के लिए तैनाती बढ़ाई गई है। सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल उच्च स्तर से मिले निर्देशों का पालन कर रहे हैं और उसी के अनुसार सीमा पर सख्ती की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार इससे राजस्व संग्रह बढ़ेगा और छोटी-छोटी खरीदारी के लिए भारत जाने की प्रवृत्ति कम होगी। व्यापारी संगठनों का कहना है कि 100 रुपये की सीमा व्यावहारिक नहीं है और इससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानी होगी। उनका सुझाव है कि कम से कम 2–3 हजार रुपये से अधिक के सामान पर ही शुल्क अनिवार्य किया जाना चाहिए। व्यापारियों का यह भी कहना है कि केवल कस्टम शुल्क लगाने से नेपाली बाजार में सुधार नहीं होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को राहत देने और शुल्क दरों में कटौती करने की जरूरत है।

सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए भारतीय बाजारों में खरीदारी करना रोजमर्रा का हिस्सा रहा है, जहां नेपाली मुद्रा में लेन-देन होता है और सामान नेपाल की तुलना में 20 से 45 प्रतिशत तक सस्ता मिलता है। पहले नमक, तेल, चीनी जैसे दैनिक उपभोग के सामान लाने में छूट थी, लेकिन अब सख्ती के चलते सामान जब्त कर कस्टम कार्यालय भेजा जा रहा है। लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि सीमा पार खरीदारी से राजस्व का नुकसान होता है, लेकिन अब छोटे घरेलू सामान पर भी सख्ती किए जाने से आम लोग असंतुष्ट हैं।

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