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Kanpur (Kanhapur) : रेल की पटरियों पर दौड़ती देश के फल उत्पादकों की सफलता, लाखों किसानों को हुआ फायदा

कानपुर (कान्हापुर) : छोटे एवं सीमांत किसानों के खराब होने वाले उत्पादों को एकत्र कर किसान रेल के माध्यम से दूर स्थित बाजार तक पहुंचा रहा है। किसान रेल 31 जनवरी 2023 तक लगभग 7.9 लाख टन कम समय में खराब होने वाले उत्पाद को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाया। इससे देश के किसानों की मूल लागत बचने के साथ ही उन्हें लाभ भी मिला है। यह जानकारी शुक्रवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी जोन 3 कानपुर के निदेशक डॉ.एस.के. दुबे ने दी।

उन्होंने बताया कि देश के किसानों की शीघ्र खराब होने वाले कृषि उत्पाद हरी सब्जियां, फल, आलू, प्याज, दूध, मछली एवं पोल्ट्री आदि के लिए अच्छे दाम पर बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करायी जा रही है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी जोन 3 कानपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री ने अक्टूबर 2014 में आकाशवाणी के माध्यम से मन की बात कार्यक्रम की शुरुआत विकास और विकासोन्मुखी सोच हेतु जन केंद्रित मॉडल के रूप में की गई थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने समसामयिक विषयों जैसे स्वास्थ्य, चिकित्सा,छोटे उद्योग, कृषि के विभिन्न आयाम तथा कृषक संगठन जैसे अति महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

उन्होंने बताया कि मन की बात की श्रृंखला 77 वां एपिसोड में प्रधानमंत्री ने 30 मई 2021 में किसान रेल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की और देश के श्रोताओं के साथ साझा किया कि किस प्रकार किसान रेल दूरदराज के छोटे और सीमांत किसानों के उत्पादों को एकत्र कर दूरस्थ बाजार तक पहुंच रहा है।

उन्होंने बताया कि पहला किसान रेल 7 अगस्त 2020 को महाराष्ट्र के देवलाली स्टेशन से बिहार के दानापुर तक शुरू किया गया। 31 जनवरी 2023 तक किसान रेल ने 2359 यात्राएं प्रदान की जिसके तहत लगभग 7.9 लाख टन शीघ्र खराब होने वाले उत्पाद को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा गया। देश के विभिन्न प्रांतों विशेष कर आंध्र प्रदेश,महाराष्ट्र,गुजरात,उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश एवं पश्चिमी बंगाल में क्रमशा 116, 1868, 62,76, 74, एवं 44 मार्गों पर किसान रेल की सेवाओं को सुनिश्चित किया गया।

भारतीय रेल ने भागीदार किसानों को दिया 122 करोड़ का अनुदान

उन्होंने बताया कि किसान रेल के माध्यम से भारतीय रेल ने लगभग 122 करोड़ रुपए का अनुदान भागीदार किसानों को दिया। जिसमें करीब 50 करोड़ का अनुदान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने प्रदान किया। डॉक्टर दुबे ने बताया कि रेलवे विभाग से प्राप्त आंकड़ों से पता चला कि वर्ष 2020-23 तक 35000 कुंतल अंगूर,19.20 हजार कुंतल अनार,5.20 हजार कुंतल अमरूद, तथा 2.5 हजार कुंतल आम को ढुलाई किया गया। जिसका मूल्य लगभग 196 लाख रुपए हुआ। डॉक्टर दुबे ने बताया कि इस प्रकार समूह के सदस्यों को अंगूर का व्यापार किसान रेल से करने से करीब 5000 प्रति कुंटल का दर प्राप्त हुआ जो सामान बाजार भाव से करीब करीब 2 गुना अधिक था।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार भारत सरकार द्वारा चरित किसान रेल दूरदराज के छोटे एवं सीमांत किसानों के उत्पाद को एक उपयुक्त बाजार उपलब्ध कराने में सफल साबित हुआ है । ऐसे किसानों की आमदनी किसान रेल के माध्यम से शीघ्र खराब होने वाले कृषि उत्पाद की ना केवल उचित विपणन संभव हो सकी है । बल्कि इनके बर्बादी में भी कमी आई है और उत्पादों को समय से उचित बाजार एवं उपभोक्ता तक पहुंचाया जा सकता है । किसान रेल जैसे प्रयास ने देश के छोटे किसानों को संगठित होकर अपने उत्पाद को विपणन के लिए प्रोत्साहित भी किया है और उनके आर्थिक विकास की दिशा में अपना अहम योगदान भी दिया है।

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