“मन की बात” कार्यक्रम के 100वें एपिसोड की पूर्व संध्या पर सांसद अनुराग शर्मा ने किया पत्रकार वार्ता का आयोजन
झांसी:(Jhansi) 30 अप्रैल को महारानी लक्ष्मीबाई पैरामेडिकल कॉलेज झांसी के ऑडिटोरियम में “मन की बात” कार्यक्रम के 100वें संस्करण के प्रसारण को लेकर कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर झांसी-ललितपुर के लोकप्रिय सांसद अनुराग शर्मा ने अपने निज निवास मंगलम पर पत्रकार वार्ता की।
पत्रकार वार्ता के दौरान सांसद अनुराग शर्मा ने बताया कि मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की जनता के साथ जुड़कर महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बात करते हैं। मन की बात आकाशवाणी पर प्रसारित किया जाने वाला एक अत्यंत ही लोकप्रिय कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता से संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम का पहला प्रसारण 03 अक्तूबर 2014 को किया गया।
यह कार्यक्रम 52 भाषाओं एवं बोलियों, जिनमें 11 विदेशी भाषाएं शामिल हैं, में प्रसारित होती हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ को देश के 100 करोड़ लोग कम से कम एक बार सुन चुके हैं। 23 करोड़ लोग नियमित रूप से ‘मन की बात’ को सुनते हैं। आईआईएम रोहतक ने ‘मन की बात’ को लेकर एक स्टडी की है। यह स्टडी प्रसार भारती ने कराई है। इस स्टडी में सामने आया कि 17.6 प्रतिशत लोग मन की बात को रेडियो पर सुनते हैं। 44.7 प्रतिशत लोग टीवी और 37.6 प्रतिशत लोग मोबाइल पर सुनते हैं।
सांसद अनुराग शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा “मन की बात” के 73वें संस्करण में झाँसी की बेटी गुरलीन चावला का जिक्र करते हुए कहा था कि बुंदेलखंड में स्ट्रॉबेरी की खेती को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। इसमें झांसी की एक बेटी गुरलीन चावला ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।
इसी प्रकार, मई 2020 को प्रसारित हुए मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी द्वारा ललितपुर के एक छोटे से गांव से निकले योग गुरु सोहन सिंह यादव, जो चीन के साथ-साथ कई देशों में भारतीय योग संस्कृति का झंडा बुलंद कर रहे हैं, की सराहना की है। यह हमारे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
मन की बात कार्यक्रम के 92वें संस्करण में, ललितपुर के महरौनी ब्लॉक क्षेत्र के निवारी गांव में बनाए गए अमृत सरोवर की प्रधानमंत्री ने भी मन की बात के दौरान सराहना की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि ललितपुर में नवनिर्मित शहीद भगत सिंह अमृत सरोवर भी लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है।
यहां की निवारी ग्राम पंचायत में बना ये सरोवर 4 एकड़ में फैला है। सरोवर किनारे हुआ वक्षारोपण इसकी शोभा बढ़ा रहा है। सरोवर के पास 35 फीट ऊंचा तिरंगा लगाया गया है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। उन्होंने ग्राम प्रधान राजीव बाजपेई की कार्यप्रणाली को भी सराहा।
उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम इतना लोकप्रिय है कि 27 जनवरी 2015 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी प्रधानमंत्री के साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया तथा भारत की जनता के पत्रों के उत्तर दिए। उन्होंने बताया कि मन की बात के सभी एपिसोड में एक अंतर्निहित विषय रहा लोगों के साथ संबंध स्थापित करना। प्रधानमंत्री एक ऐसा वातावरण निर्माण करने के लिए जाने जाते हैं जहां लोग उनसे खुलकर बात कर सकते हैं।
सांसद शर्मा ने कहा कि सभी प्रसारणों का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण के साथ चरित्र-निर्माण करना है। ”सेल्फी विद डॉटर” अभियान के माध्यम से बालिकाओं की गरिमा को बढ़ावा देने का अभियान हो, अभियान के माध्यम से हमारे नायकों को श्रद्धांजलि देना या ”फिटइंडिया” अभियान के माध्यम से फिटनेस के बढ़ावा देना, सभी का उद्देश्य चरित्र निर्माण था।
चाहे कोविड 19 महामारी का कठिन समय हो या देश के सामने कोई अन्य त्रासदी, प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा ऐसे समय में आशा की किरण दिखाई है। उनके भरोसा देने वाले शब्द नागरिकों के लिए उत्साहजनक और सुकून देने वाले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृति, लोक परंपराओं, भाषा, लोगों की कहानियां और त्यौहार जो पहले मुख्यधारा में शामिल नहीं थे उनसे अवगत करवाने के लिए प्रभावी ढंग से इस मंच का उपयोग किया है। उन्होंने उन लोगों और उन क्षेत्रों को शामिल किया, जो भारत गाथा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सुदूर स्थानों की हमारी संस्कृति, कहानियों और परंपराओं के बारे में बात की। उन्होंने सफलतापूर्वक विभिन्न पीढ़ियों के बीच एक पुल बनाया है और उन सभी को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। मन की बात के माध्यम से प्रसारित बातचीत और विचारों ने राष्ट्रीय पुनरुत्थान को गति दी है। मन की बात कार्यक्रम के हर एपिसोड में श्रोताओं की संख्या बढ़ी है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने कई सामाजिक अभियानों को गति दी है।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से आज 95 प्रतिशत खिलौना उद्योग घरेलू उद्योग बन गया है। घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिला है। जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। ”अमृत सरोवरों” का निर्माण कार्य इसका एक जीता-जागता उदाहरण हैं। पर्यावरण संरक्षण एक आंदोलन बना है। स्वच्छता अभियान सफल हुआ है।


