
जम्मू : कानून, न्याय एवं संसदीय मामलों के मंत्री किरन रिजिजू ने जम्मू विश्वविद्यालय में भारत के संविधान के डोगरी वर्ज़न के पहले संस्करण का विमोचन किया।
इस कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए मंत्री ने इस अनुवादित दस्तावेज को आम लोगों को न्याय प्रदान करने में बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एक आम व्यक्ति द्वारा न्याय प्राप्त करने के लिए कानून को समझना आवश्यक है और इसे अपनी मातृभाषा में संहिताबद्ध करने से बेहतर नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि डोगरी भाषा को 2003 में संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने के बाद कार्य थोड़ा देर से पूरा हुआ है लेकिन लोगों के बीच इसके प्रभाव को आगे बढ़ाने में और देरी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने इस नेक काम के लिए अनुवादकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने हेतु विश्वविद्यालय की सराहना की।
न्याय वितरण की प्रक्रिया को आसान और सस्ता बनाने के संबंध में विकास के बारे में उन्होंने खुलासा किया कि सरकार सभी नागरिकों की समझ के लिए एक मूल शब्दावली तैयार करने के लिए लगभग 65000 शब्दों की कानूनी शब्दावली का डिजिटलीकरण कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि निचली न्यायपालिका में बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए 9000 करोड़ रुपये और ई-कोर्ट परियोजना के लिए 7000 करोड़ रुपये का उद्देश्य न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को आसानी से सुलभ और स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराना है। वह समय दूर नहीं जब ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के पूरा होने के बाद हमारी अदालतें पूरी तरह से कागज रहित हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना ने कोविड-19 महामारी के दौरान अदालतों के कामकाज में काफी मदद की है।
उन्होंने प्रौद्योगिकी को हमारी अदालतों में लंबित मामलों को कम करने के समाधान के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर दुख होता है कि लगभग 5 करोड़ मामले अभी भी उनके अंतिम निपटान के लिए लंबित हैं। प्रौद्योगिकी हमारे बचाव में आ सकती है, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों या यहाँ तक कि निचली अदालतों की बेंचों को उनके परिसरों की चारदीवारी से बाहर भी बढ़ा सकती है।
मंत्री ने उन युवा वकीलों की बहुत प्रशंसा की जो लोगों को मुफ्त न्याय प्रदान करने में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाने में योगदान करते हैं। उन्होंने बताया कि निःशुल्क की अवधारणा एक अद्भुत कारण है और जनता के व्यापक हित के लिए इस कार्यक्रम के माध्यम से अभिजात वर्ग को भी अपनी सेवाओं का विस्तार करने में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के पास भाषण की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के बीच एक साथ संतुलन बनाने का महत्वपूर्ण कार्य है। अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन. कोटिश्वर सिंह ने कहा कि सभी कानूनी प्रवचन चाहे अकादमिक हों या कानूनी, जनता के लाभ के लिए हैं। उद्देश्य तभी बेहतर तरीके से पूरा हो सकता है जब इस तरह की बहसें आम जनता की भी समझ में आ जाएं। यह तभी संभव है जब देश का कानून जनता के लिए उस भाषा में उपलब्ध हो जिसे वे अच्छी तरह समझते हैं।
इस अवसर पर जिन लोगों को इस अनुवाद कार्य के लिए मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया उनमें तत्कालीन प्रमुख डोगरी विभाग जम्मू विश्वविद्यालय प्रो. अर्चना केसर, डोगरी लेखक तथा अनुवादक प्रकाश प्रेमी, डोगरी लेखक तथा अनुवादक यश पॉल निर्मल और डोगरी लेखक तथा अनुवादक निर्मल विक्रम शमिल हैं।


