अमृता शेरगिल आधुनिक भारतीय चित्रकला की जनक थीं। उन्होंने भारत की परंपरागत चित्रशैली में बुनियादी बदलाव कर एक ऐसी नई शैली को जन्म दिया. जिससे भारतीय जन जीवन और प्रकृति कला मुख्य विषय बन गए। इसके पहले देवी-देवताओं के चित्र मिथक और धर्म का परिवेश ही चित्रकला की मुख्य प्रेरणा होता था। अमृता की मृत्यु बहुत कम उम्र हुई। पर उसका प्रभाव भारतीय कला जगत पर आज भी है। अपने एक मित्र कार्ल खंडालावाला को लिखे अपने एक पत्र में उन्होंने अपनी साहित्यिक अभिरुचि और रुचि के साहित्यकारों व उनकी पुस्तकों का खुलासा जरा विस्तार से किया है।
ऐसी कविता शायद पढ़ ही नहीं पाती
आधुनिक हंगारी साहित्य और कविता मेरा रोग बन चुकी है। कुछ फ्रांसीसी कवि भी मुझे बहुत अच्छे लगते हैं – बादलेयर या कभी-कभी बरलेन, खासकर सीधी-सादी कविता में, जिसमें बिंबात्मकता बहुत अधिक न हो, मैं नहीं समझती कि बरलेन से कोई आगे जा सका है। बादलेयर मुझे पसंद हैं, लेकिन कभी-कभी मुझे लगता है कि बादलेयर कहीं-कहीं जरूरत से ज्यादा नाटकीय और अति-नाटकीय हो जाते हैं। आधुनिक फ्रांसीसी साहित्य में मेरी दिलचस्पी कम है। उसमें रोमां रोलां अपवाद हैं। उसमें भी उनकी जीवनियां नहीं, बल्कि ‘ज्यां क्रिस्ताफ’। यद्यपि वे कभी-कभी फ्रांसीसी से ज्यादा जर्मन मालूम पड़ते हैं। जर्मनों में टामस मान। आधुनिक अंग्रेजी में अल्दुअस हक्सले, वर्जीनिया वुल्फ, बर्नार्ड शॉ । जीवनीकारों में हैरेस (सच बोलूं तो जीवनीकारों में वही एक ऐसा जीवनीकार है, जिसे मैं पसंद कर पाती हूं।) सिंक्लेयर लुइस भी मुझे पसंद हैं और आखिर में रूसी साहित्य, जिसमें सबसे अधिक मेरो समय लगता है दॉस्तोयेव्स्की (द पजेज्ड ब्रदर्स कारमाजोव, ईडियट ) । इस वक्त मैं जेम्स जॉयस का ‘यूलिसिस’ बड़े जोरों से पढ़ रही हूं। एक आत्मस्वीकृति आपके सामने करना चाहती हूं। अंग्रेजी कविता के प्रति मेरे मन में एक वितृष्ण भाव है, खासकर रोमांटिक और विक्टोरिया युग की कविता के बारे में। ध्वनि, लय और तुकों के प्रति जो दकियानूसीपन ये लोग पैदा करते हैं, उसमें एक-दो लाइन पढ़ने के बाद मेरे दिमाग में पूर्णविराम लग जाता है, इसलिए मैं ऐसी कविता शायद पढ़ ही नहीं पाती, पढ़ती भी नहीं हूं।’
(शिमला से 24.8.37 को कार्ल खंडालावाला के नाम लिखा पत्र)
भारतीय कला ने केवल मिथकों और रूमानियत की परंपरा से फल-फूल कर एक गलती की। मैं एक व्यक्तिवादी हैं, जो एक नई तकनीक का विकास कर रहा है, जो विशुद्ध रूप से पारंपरिक भारतीय नहीं है, लेकिन जिसकी आत्मा मूलतः भारतीय है।
अमृता शेरगिल


