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Gandhinagar : गुजरात यात्रा पर आए भूटान नरेश को मुख्यमंत्री पटेल ने कच्छ की चार शताब्दी पुरानी कलाकृति भेंट की

कच्छ का रोगन आर्ट : कपड़े पर की जाने वाली पेंटिंग की चार शताब्दी पुरानी कला

कच्छ जिले के भुजोडी गाँव की विख्यात परंपरागत हस्तकला है भुजोडी बुनाई कला

गांधीनगर : भारत के पड़ोसी देश भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे गुजरात की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनकी इस यात्रा के दौरान वांगचुक तथा तोबगे सोमवार को गांधीनगर पहुंचे, जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से भेंट की।

पटेल ने भूटान नरेश तथा प्रधानमंत्री के सम्मान में स्नेह भोजन दिया तथा उन्हें कच्छ की विश्वविख्यात रोगन कला की प्रतिकृति एवं भुजोडी की शॉल स्मृति भेंट स्वरूप दी।

भुजोडी बुनाई कला राज्य के कच्छ जिले के भुजोडी गाँव की विख्यात परंपरागत हस्तकला है। भुजोडी गाँव के कुशल बुनकर पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरागत तकनीक का उपयोग कर हाथ बुनाई के उत्कृष्ट कपड़े बनाते हैं। भुजोडी बुनाई कला में ऊन तथा कॉटन जैसे उच्च गुणवत्ता के फाइबर्स का उपयोग किया जाता है और ये फाइबर्स स्थानीय स्तर पर ही प्राप्त किए जाते हैं। शॉल, स्टॉल्स, साड़ियों, कंबलों आदि जैसे विभिन्न हाथ बुनाई उत्पाद बनाने के लिए भुजोडी के बुनकर अतिरिक्त वेफ्ट विविंग टेक्निक यानी ताने-बाने वाली बुनाई तकनीक का उपयोग करते हैं। भुजोडी बुनाई की अद्भुत सुंदरता तथा समृद्ध विरासत के कारण वह विश्वभर में अत्यंत लोकप्रिय हस्तकला बनी है।

भुजोडी बुनाई कला अपनी जटिल डिजाइन तथा उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री के कारण भारत में और समग्र विश्व में फैशन डिजाइनर्स एवं उपभोक्ताओं में लोकप्रिय पसंद बनी है। भुजोडी बुनाई कला स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, कारण कि भुजोडी गाँव के कई परिवार आज भी इस कला के माध्यम से ही जीवन निर्वाह कर रहे हैं। भावी पीढ़ियों के लिए इस कला का संवर्द्धन करने के उद्देश्य से उसे प्रमोट करने के प्रयास किए जा रहे हैं। गुणवत्तायुक्त उत्पाद देने वाली भुजोडी बुनाई कला टेक्सटाइल्स आर्ट्स की दुनिया में सच्चे रत्न के समान है।

रोगन आर्ट : कच्छ की चार शताब्दी पुरानी कला

रोगन आर्ट कपड़े पर पेंटिंग करने की एक पद्धति है, जो चार शताब्दी पुरानी कला है और यह कला केवल गुजरात के कच्छ जिले में देखने को मिलती है। रोगन कला एक समय लुप्त होने को थी, परंतु राज्य सरकार एवं कच्छी समाज के संयुक्त प्रयासों के कारण इस कला का पुनरुत्थान हुआ है। रोगन कला में जो पेंटिंग की जाती है; उसमें मुख्य घटक के रूप में अरंडी के तेल का उपयोग किया जाता है। रोगन मूलत: फारसी शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘तेल आधारित’। इस प्रकार; रोगन कला में उपयोग किए जाने वाले मुख्य घटक के नाम के आधार पर इसे रोगन आर्ट नाम दिया गया है। रोगन आर्ट में देखी जाने वाली प्रचलित डिजाइन फूल और मंडला पैटर्न है। रोगन आर्ट में ‘ट्री ऑफ लाइफ’ यानी जीवन वृक्ष सबसे अधिक सराही गई डिजाइन है और उस पर काम करना भी बहुत कठिन है।

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