संगठनों के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एडीएम को दिया ज्ञापन
फिरोजाबाद : समलैंगिक विवाह के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा विधि मान्य किए जाने के निर्णय की तत्परता को लेकर लोगों में रोष है। विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को विरोध जताते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि भारत देश आज सामाजिक, आर्थिक क्षेत्रों की अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। तब विषयांतर्गत विषय को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनने एवं निर्णीत करने की कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है। देश के नागरिकों की बुनियादी समस्याओं जैसे गरीबी उन्मूलन, निःशुल्क शिक्षा का क्रियान्वयन, प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार, जनसंख्या नियंत्रण की समस्या, देश की पूरी आबादी को प्रभावित कर रही है। उक्त गंभीर समस्याओं के संबंध में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न तो कोई तत्परता दिखाई गयी है ना ही कोई न्यायिक सक्रियता दिखाई है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष अम्बेश शर्मा ने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों, जातियों, उप जातियों का देश है। इसमें शताब्दियों से केवल जैविक पुरूष एवं जैविक महिला के मध्य, विवाह को मान्यता दी है। दो विषम लैंगिकों का मिलन है, मानव जाति की उन्नति का माध्यम भी है। शब्द विवाह को विभिन्न नियमों, अधिनियमों, लेखों एवं लिपियों में परिभाषित किया गया है। सभी धर्मों में, केवल विपरीत लिंग के दो व्यक्तियों के विवाह का ही उल्लेख है। विवाह को दो अलग लैंगिकों के पवित्र मिलन के रूप में मान्यता देते हुये भारत का समाज, विकसित हुआ है।
उन्होंने कहा कि पाश्चात्य देशों में भी दो पक्षों के मध्य,अनुबंध या सहमति को मान्यता नहीं दी है। सृष्टि की रचना व संवर्धन के संचालन के लिए जीव-जन्तु, पशु-पछी व समस्त प्राणियों में मेल-फीमेल व्यवस्था ईश्वर प्रदत्त है। उसी व्यवस्था के अनुरूप हमारी मान्यताएं व सामाजिक परंपराए संचालित हो रही हैं। इनको खण्डित करने के परिणाम बहुत ही घातक होंगे।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, सवर्ण संगठन फिरोजाबाद, जिला ब्राह्मण महासभा, विश्व हिन्दू परिषद, अखिल क्षत्रिय महासभा, अधिवक्ता परिषद, बार एसोसिएशन टूंडला सहित कई संगठनों के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम भेजे ज्ञापन में अनुरोध किया कि समलैंगिक विवाह जैसे प्रस्ताव को स्वीकार न किया जाए। ऐसे विषय हमारी सनातन संस्कृति व वैदिक परंपरा के लिए बहुत घातक हैं। ज्ञापन देने वालों में सभी संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे।


