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पिता का पत्र पुत्री के नाम

क्या तुम भी मां की तरह

बेटी, दिव्या, शुभाशीष

अब तुम ससुराल वाली हो गई हो। सास, ससुर, ननद और पति वाले परिवार के साथ तुम्हारा नाता जुड़ गया है। भरा-पूरा संस्कारी परिवार है तुम्हारा। सब तरह से सुखी परिवेश तुम्हें मिला है, लेकिन मेरी आंखों की नींद उड़ गई है। चिंतित हूं मैं, तुम्हारे भविष्य को लेकर। मेरा ये सपना था कि मैं तुम्हें एक सफल खिलाड़ी के रूप में देखूं। जिस स्थान की मैं कल्पना करता हूं, उसकी काफी सीढ़ियां तुम चढ़ चुकी हो, किंतु मंजिल तो ‘ओलिंपिक में पहुंचना है’ – जो अभी बहुत दूर है। तुमने उस तक पहुंचने के लिए जुनून की हद तक मेहनत की है। मैं तुम्हारे उस जुनून में सदा साथ रहा और उसे देखकर मैं फूला न समाता था, किसी हद तक कुर्बान था उस जज्बे पर।

बेटा तुम्हें याद होगा कि तुम्हारी मां भी एक राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन प्लेयर थीं। वो भी तुम्हारी तरह जुनूनी व जज्बाती थीं। हमारी शादी के बाद उसके इस जुनून को न सराहा गया, न कोई बढ़ावा मिला। उल्टे उसे ताने और आलोचना सुनने को मिली – ‘अरे! खेल और खिलाड़ी का लड़कियों से क्या संबंध। उन्हें तो बच्चे पालने हैं, घर-बार संभालना है..

प्रैक्टिस के लिए जब घर से शॉर्ट और टी-शर्ट पहन कर जाती, तो घर के लोग कटाक्ष करने में कोई कमी न रखते। आखिर एक दिन तंग आकर रोते हुए उसने रैकेट के टुकड़े-टुकड़े करके घर की पिछली गली में फेंक दिए। सच्चाई तो यह है कि मैंने भी उस दिन राहत की सांस ली थी, क्योंकि मैं भी रोज-रोज की पारिवारिक चिक-चिक से तंग था।

आज तुम भी अपनी ससुराल में हो। ठीक तीस वर्ष पूर्व जिस स्थिति में तुम्हारी मां थीं, किंतु अब मुझे तेरी मां का उस दिन का दर्द बेहद टीसता है, जब मैं सोचता हूं ‘क्या तुम भी मां की तरह…!’ डरता हूं कि हम सबका सपना अधूरा न रह जाए…! तुम्हारे सामने सैकड़ों उदाहरण हैं – मैरी कॉम, मल्लेश्वरी, पूनियां… और भी बहुत हैं, जो विवाहित होने के साथ बच्चों की मां हैं और साथ ही एक सफल खिलाड़ी भी हैं। आज भी वे उसी जुनून के साथ आगे बढ़ रही हैं। परेशानियां तो आती ही हैं और सभी को उनका सामना करना पड़ता है, किंतु मेरा विश्वास है कि तुम अपनी मां की तरह मैदान नहीं छोड़ोगी। ‘किसी भी जुनून को कायम रखने के लिए आत्मविश्वास सबसे बड़ी कुंजी है।’ एक बात और – तुम्हारे सास-ससुर गरीब व अनपढ़ हैं, किंतु बहुत समझदार हैं। ये मैं जान चुका हूं। वे तुम्हारे अस्तित्व के स्वतंत्र विकास में कभी बाधा नहीं बनेंगे। मुझे आज ये स्वीकार करने में जरा भी झिझक नहीं है कि मेरे मां-बाप पढ़े-लिखे और अमीर होकर भी तुम्हारी मां की इच्छा व करियर के प्रति सजग न थे। यहां तुम्हें ऐसा अच्छा परिवार मिला है, तुम भाग्यशाली हो ।

आशा है कि ऐसे सुलझे व संस्कारी परिवार में रहते हुए तुम्हारे जुनून को समझने में हर कोई तुम्हारे साथ होगा…! इसी आशीर्वाद के साथ

तुम्हारे
पापा

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