देहरादून: (Dehradun) पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सोमवार को ‘श्रीअन्न’ महोत्सव में कहा कि किसानों को सशक्त करना हमारी प्राथमिकता होना चाहिए। इस दौरान कोश्यारी ने नया नारा देते हुए कहा कि कौंदा-झिंगौरा खाएंगे, आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाएंगे।
सोमवार को हाथीबड़कला स्थित सर्वे ऑफ इण्डिया, हाथीबड़कला, स्थित सर्वे ग्राउंड में चार दिवसीय ‘श्री अन्न’ महोत्सव के तीसरे दिन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ये बातें कहींं। इस दौरान कोश्यारी और विशिष्ट अतिथि के तौर पर पर्यावरणविद डा. अनिल जोशी ने मिलेट्स पर आधारित विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सभी अतिथियों का पहाड़ी टोपी, शाल और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।कोश्यारी ने कहा कि मुझे यहां आकर सबसे अच्छा यह लगा कि यहां के स्टॉल बहुत सुन्दर हैं और सभी स्टॉलों पर महिलाओं ने इसका प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके विशेष प्रयासों से आज मोटे अनाज को ‘श्री अन्न’ का नाम दिया गया।
कोश्यारी ने अपने गांव की याद ताजा करते हुए कहा कि बचपन में ‘मुझे गेहूं की रोटी मिलती थी और मेरी बहनों को मडुवे की रोटी, जिस कारण मेरा पेट हमेशा ही खराब रहता था और आज भी है।’ उन्होंने कहा कि यह मातृशक्ति के लिए बहुत ही अच्छा अनाज है। इसके लिए हमारा पहाड़ी क्षेत्र बहुत उपयोगी हैं। माणा और गूंजी में सिर्फ मोटा अनाज की पैदा होता है।उन्होंने कहा कि जापान वाले भी मानते हैं कि उत्तराखंड का मोटा अनाज बेबी फूड के लिए अत्यधिक फायदेमंद है,क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है।
महाराष्ट्र राजभवन में मड़ुवे के बिस्कुट अनिवार्य था –
पूर्व राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि महाराष्ट्र राजभवन में मैंने सिर्फ मड़वे के बिस्कुट अनिवार्य कर दिये थे ताकि सभी को उत्तम स्वास्थ्य मिले। उन्होंने कृषि मंत्री से अपेक्षा की कि उत्तराखंड में भी मड़ुवे के बिस्कुटों को अनिवार्य किया जाए ताकि इसका प्रचार-प्रसार सहित सभी को उत्तम स्वास्थ्य मिल सके।कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पद्मश्री एवं पद्मभूषण डा.अनिल जोशी ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश की तरक्की के लिए सिर्फ खेती-बाड़ी ही एक अच्छा साधन है और इसके लिए एक नये सिरे से सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने कौंदा-झिंगौरा खाऐगे, पहाड़ी राज्य बनाएंगे के नारे को दोहराते हुए प्रधानमंत्री मोदी का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि मिलेट और माइनर फसलों के लिए उत्तराखंड विश्व स्तर पर प्रख्यात है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि ‘श्री अन्न’ के प्रोत्साहन और उसके प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लगातार विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में स्टेट मिलेट मिशन के अंतर्गत 73 करोड़ का बजट में प्रावधान किया गया है। कृषि मंत्री ने मडुंवा, झिंगौरा जैसी फसलों को पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ावा देकर कृषकों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए भी विभाग के संकल्प को दोहराया। ‘श्री अन्न’ उत्तराखंड की परंपरागत खेती में है। स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभदायक है, जो कभी गरीबों का खाद्यान्न हुआ करता था, आज अमीरों की थाली में शामिल हो गया है।
इस मौके पर कृषि निदेशक गौरीशंकर,ग्राम्य विकास आयुक्त आनन्द स्वरुप, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक पुण्डीर,आदित्य चौहान,जोगेन्द्र पुण्डीर ज्योति कोटिया,वीर सिंह, प्रदीप पाण्डे, विवके उपाध्याय, मोहम्मद असलम,अपर निदेशक केसी पाठक,संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार, जैविक उत्पाद परिषद के एमडी विनय कुमार सहित कई अन्य अधिकारी एवं प्रदेश के सभी जनपदों से आये हुए कृषक भाई-बहन उपस्थित थे।


