सरिया के आड़ में मुस्लिम बच्ची के साथ हो रहा अन्याय
गांव, गंगा और गाय के प्रति व्यवहार में लाना होगा बदलाव
प्रकृति से, संस्कृति से देश में आएगी प्रसन्नता
देहरादून : राष्ट्र जागरण अभियान की संयोजिका और सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता सुबुही खान ने शनिवार को एक कार्यक्रम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन करते हुए भारत के लिए यह कानून जरूरी बताया। इसके लिए उत्तराखंड सरकार की पहल की प्रशंसा की। साथ ही कहा कि विधर्मी ताकतें अपने स्वार्थ के लिए अलगाववाद की भावना पैदा कर रही हैं। ऐसे में हम युवाओं को प्रकृति से संस्कृति की ओर आने के लिए गांव, गंगा और गाय के प्रति व्यवहार में बदलाव लाना होगा।
शनिवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में बतौर मुख्य वक्ता समाजसेवी सुबुही खान ने सर्वत्र सेवा फाउंडेशन की ओर से आयोजित राष्ट्रीय जागरण अभियान की संवाद सभा में “मां भारती के समक्ष चुनौतियों : कारण एवं निवारण” विषय पर गोष्ठी में यह विचार व्यक्त किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार की ओर से यूसीसी कानून लागू करने की राज्य सरकार की पहल को सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि समाज में गलत भ्रम फैलाया जा रहा है। यह समान कानून भारत के सभी नागरिकों पर लागू होगा। यह मजहब के खिलाफ नहीं है। महिलाओं और बच्चों के सुरक्षा और सम्मान के लिए जरूरी है।
सुबुही खान कहा कि तलाक-ए-हसन आज भी चल रहे हैं। हर महीने तलाक दिया जा रहा है। 21वीं सदी में लोकतांत्रितक देश में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। महिलाओं के साथ अपराध हो रहे हैं, इसे कैसे रोका जाए यह समझने की जरूरत है। पर्सनल और सिविल लॉ की आड़ में अपराध हो रहा है। सरिया की आड़ में मुस्लिम बच्चों के साथ शारीरिक शोषण कहीं से सही नहीं है। उन्होंने अपने तेलंगाना प्रवास का जिक्र करते हुए कहा कि अरब के अस्सी-अस्सी साल के शेख आकर 12-12 साल की छोटी बच्चियों के साथ निकाह करते हैं।
सुबुही खान ने कहा कि देश में कुछ विधर्मी मानसिकता के लोग कुछ घटनाओं में जातिगत रूप से देश को जातियों में विभाजित कर हमारे राष्ट्र को कमजोर करने का षड्यंत्र कर रहे हैं। जब हम देश से प्रेम करते हैं तो देशभक्ति सिर्फ भावना में नहीं जीवन के व्यवहार में भी दिखनी चाहिए। हमारा गाय के प्रति, गंगा के प्रति, गांव के प्रति सम्मान सिर्फ भावना नहीं बल्कि जीवन व्यवहार में परिलक्षित होना जरूरी है। अगर हम प्रकृति की ओर लौट आएंगे, प्रकृति को पूजेंगे, प्रकृति की मानेंगे.. तभी हम वापस भारतीय संस्कृति की ओर पहुंचेंगे।
उन्होंने आतंकवाद एवं अलगाववादी शक्तियों से लड़ने के लिए भारत की चिंतन प्रणाली एवं सनातन प्रतिबद्धता की जरूरत बताई। प्राकृतिक शक्ति और अध्यात्मिक बल हमारे पास है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से संस्कृति की ओर आएंगे तो गंगा की निर्मलता और अविरलता बनी रहेगी। उन्होंने मजार तोड़ने के एक सवाल पर कहा कि आस्था के नाम पर कुछ भी नहीं हो सकता। यह सब भारत के आध्यात्मिक बल को तोड़ने के लिए किया जा रहा है।
कार्यक्रम में डॉ गोपाल शर्मा, कुसुम केडवाल, डॉ गीता खन्ना, अखंड प्रताप सिंह, विष्णु भट्ट, सुभांग गोयल, सुरेन्द्र मित्तल, अनिल नंदा, राजेश सेठी, बलदेव परासर सहित प्रबुद्धजन व महिला शक्ति मौजूद रहे।


