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बादल घिर आए, गीत की बेला आई

https://youtu.be/4z1CgRXfDVA

बादल घिर आए, गीत की बेला आई।
आज गगन की सूनी छाती
भावों से भर आई,
चपला के पावों की आहट
आज पवन ने पाई,
डोल रहें हैं बोल न जिनके
मुख में विधि ने डाले
बादल घिर आए, गीत की बेला आई।
बिजली की अलकों ने अंबर
के कंधों को घेरा,
मन बरबस यह पूछ उठा है
कौन, कहां पर मेरा?
आज धरणि के आंसू सावन
के मोती बन बहुरे,
घन छाए, मन के मीत की बेला आई।
बादल घिर आए, गीत की बेला आई।

हरिवंश राय बच्चन
छायावादी कविता के प्रमुख स्वरों में से एक। प्रमुख कृतियां: मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश।

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