छतरपुर : मंगलवार को नव संवत्सर (हिंदु नववर्ष) के पहले दिन यानि कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस शहर के तमाम मंदिरों में आस्था का सैलाब देखने को मिला। सभी मंदिरों में सुबह 4 बजे से पूजा-अर्चना का दौरान शुरू हो गया था, जो दोपहर तक चलता रहा। शहर के महोबा रोड पर मौजूद ग्राम हमा में स्थित सिद्धपीठ माँ काली देवी मंदिर और खेरे की देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में देवी मां के भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली।
माँ काली देवी मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब
मंदिर के पुजारी पं. राजकुमार गोस्वामी ने बताया कि वैसे तो पूरे वर्ष मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में भक्तों की संख्या में अधिक होती है। मंगलवार से शुरू हुए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हजारों की संख्या में देवी मां के भक्त पूजा-अर्चना करने पहुंचे। सुबह से ही देवी मां की आराधना का दौर शुरू हो गया था, जो अगले 9 दिनों तक जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि मां काली का यह दिव्य मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केन्द्र रहा है। मंदिर में विराजमान मां काली की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती है। सुबह के समय प्रतिमा को कन्या रूप में देखा जाता है, जबकि दोपहर में यह स्वरूप युवा अवस्था का हो जाता है। शाम के वक्त मां के दर्शन वृद्धावस्था के रूप में होते हैं। ऐसी मान्यता है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से हाजिरी लगाने वाले भक्तों की हर एक मनोकामना पूरी होती है।
खेरे की देवी मंदिर में लगा रहा भक्तों का तांता
वहीं दूसरी ओर शहर के प्रसिद्ध खेरे की देवी मंदिर भी नवरात्रि के पहले दिन भक्तों का तांता लगा रहा। सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे देवी मां को जल चढ़ाने के लिए मंदिर पहुंचने लगे थे। पूजा-अर्चना का दौर दोपहर तक चला। उल्लेखनीय है कि उक्त मंदिर को शहर का सबसे प्राचीन मंदिर कहा जाता है, जिस कारण से इस मंदिर में भक्तों की विशेष आस्था है। मंदिर के पुजारी रज्जू महाराज ने बताया कि अगले 9 दिनों तक मंदिर में प्रतिदिन विविध धार्मिक आयोजन होंगे और प्रतिदिन इसी तरह से भक्तगण मंदिर पहुंचकर पुण्यलाभ अर्जित करेंगे।


