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Chennai : जोनाथन ट्रॉट ने अफगानिस्तान को कहा अलविदा

Chennai: Jonathan Trott bids farewell to Afghanistan

चेन्नई : (Chennai) अफगानिस्तान के मुख्य कोच जोनाथन ट्रॉट (Afghanistan head coach Jonathan Trott) ने 2026 टी20 विश्व कप में टीम के अंतिम ग्रुप मुकाबले के बाद अपने कार्यकाल को भावुक अंदाज़ में अलविदा कहा। कनाडा के खिलाफ जीत के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में 44 वर्षीय ट्रॉट अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने स्वीकार किया कि अफगानिस्तान के साथ उनकी यात्रा ‘संयोग से शुरू हुई’, लेकिन यह अनुभव उनके जीवन के सबसे संतोषजनक अध्यायों में से एक रहा।

अफगानिस्तान ने अपने अंतिम ग्रुप मैच में कनाडा को हराया। इस मुकाबले में इब्राहिम ज़दरान (Ibrahim Zadran) 95 रन की नाबाद पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच बने। उन्होंने अपना पुरस्कार कोच ट्रॉट को समर्पित किया और विदाई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने बैठकर अपने कोच को भावुक होते देखा।

2022 में संभाली थी कमान

जोनाथन ट्रॉट ने 2022 में अफगानिस्तान टीम की कमान संभाली थी। उन्होंने खुलासा किया कि मूल रूप से यह पद ग्राहम थॉर्प को संभालना था, लेकिन परिस्थितियों के चलते वह यह जिम्मेदारी नहीं ले सके। इसके बाद ट्रॉट को यह अवसर मिला।

उन्होंने कहा, “मुझे यह मौका संयोग से मिला। ग्राहम थॉर्प (Graham Thorpe) ने मेरे कोचिंग करियर के विकास में बड़ी भूमिका निभाई थी। जब यह जिम्मेदारी मिली तो मैंने इसे दोनों हाथों से स्वीकार किया और पूरी निष्ठा से काम किया।”

उपलब्धियों से भरा रहा कार्यकाल

ट्रॉट ने अपने कार्यकाल की कई यादगार उपलब्धियों को याद किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान ने विश्व कप में पहली बार पाकिस्तान को हराया, इंग्लैंड को मात दी और पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ विदेशी सरजमीं पर द्विपक्षीय सीरीज जीती।

हालांकि 2026 टी20 विश्व कप में टीम 2024 जैसी सफलता दोहराने में सफल नहीं रही, लेकिन ट्रॉट ने परिणामों से अधिक टीम के मानवीय विकास को अहम बताया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार इब्राहिम ज़दरान, अजमतुल्लाह उमरज़ई और रहमानुल्लाह गुरबाज़ (Ibrahim Zadran, Azmatullah Umarzai, and Rahmanullah Gurbaz) जैसे खिलाड़ियों को देखा, तो उनकी प्रतिभा ने प्रभावित किया।

‘व्यक्तियों से टीम’ बनने का सफर

ट्रॉट ने बताया कि अफगानिस्तान की असली ताकत केवल उनके स्पिन गेंदबाज नहीं, बल्कि टीम के रूप में उनका विकास है। उन्होंने कहा कि जब वह पहली बार टीम के साथ आयरलैंड दौरे पर गए थे, तब उन्हें महसूस हुआ कि खिलाड़ियों में अपार प्रतिभा है, लेकिन उन्हें केवल संरचना और पेशेवर रवैये की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “थोड़ी-सी संरचना, पेशेवर मानसिकता और उच्च मानक जोड़ने से बड़ा बदलाव आया। आज की टीम और पहले की टीम में जमीन-आसमान का अंतर है,” ।

सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा प्रदर्शन

ट्रॉट ने यह भी रेखांकित किया कि अफगानिस्तान के खिलाड़ी सीमित संसाधनों में खेलते हैं। उनके पास स्थायी घरेलू मैदान, आधुनिक अकादमियां और बुनियादी ढांचे की वैसी सुविधाएं नहीं हैं जैसी अन्य बड़ी टीमों के पास हैं।

उन्होंने कहा, “इन खिलाड़ियों को जो सुविधाएं मिलती हैं, उसकी तुलना में उनका प्रदर्शन अविश्वसनीय है। कई खिलाड़ियों को वह शिक्षा और प्रशिक्षण नहीं मिला जो मुझे मिला था, फिर भी वे 20 हजार दर्शकों के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव संभालते हैं। मैं हर खिलाड़ी को सलाम करता हूं।”

मैदान के बाहर भी बदली जिंदगी

ट्रॉट ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि यह देखना रहा कि खिलाड़ियों की जिंदगी मैदान के बाहर भी बदली है।

उन्होंने कहा, “इन खिलाड़ियों ने न केवल अपने खेल से, बल्कि अपने परिवारों की तकदीर बदलने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। युवा लड़कों को जिम्मेदार युवाओं में बदलते देखना मेरे लिए बेहद संतोषजनक रहा,”।

भविष्य पर नजर

अफगानिस्तान की बल्लेबाजी को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रॉट ने टीम में गहराई बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भविष्य में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए विविध विकल्प तैयार करना जरूरी है, जैसे बाएं-दाएं हाथ के संयोजन और अतिरिक्त बल्लेबाजी विकल्प।

अपने अगले कदम पर ट्रॉट ने फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। हालांकि इंग्लैंड टीम के कोच बनने की संभावना पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैंने अपने करियर का बड़ा हिस्सा इंग्लैंड में बिताया है। किसी दिन उस टीम को कोच करने का मौका मिले तो अच्छा लगेगा, लेकिन अभी मैं कुछ दिन आराम करना चाहता हूं।”

जोनाथन ट्रॉट (Jonathan Trott) का कार्यकाल उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने गर्व के साथ कहा कि अफगानिस्तान के साथ बिताए गए ये साल उनकी जिंदगी की अमूल्य यादें बनकर रहेंगे।

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